अतिरिक्त जिला और सेशन जज करनैल सिंह की अदालत ने सोमवार को भ्रूण परीक्षण और गर्भपात के एक मामले में कोटकपूरा की दो महिला डॉक्टरों समेत छह लोगों को बरी कर दिया।
इस मामले में इन लोगों को 28 अक्तूबर 2013 को सीजेएम डॉ. रजनीश की अदालत ने ढाई-ढाई साल कैद और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी जिसके खिलाफ इन्होंने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी।
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने एक शिकायत के आधार पर कोटकपूरा के सिंगला नर्सिंग होम की संचालिका डॉ. स्नेह प्रभा और डॉ. अलका गुप्ता समेत पीड़ित विवाहिता के पति बलतेज सिंह, सास जसवंत कौर, ननद सिमरजीत कौर और मौसेरी सास महिंदर कौर के खिलाफ अदालत में पीएनडीटी एक्ट 1994 के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। विभागीय शिकायत के अनुसार यह घटना जून 2011 की थी।
मोगा के गांव पंजगराई खुर्द की विवाहिता जसप्रीत कौर के गर्भ धारण करने पर उसके ससुरालियों ने कोटकपूरा के सिंगला नर्सिंग होम के अल्ट्रा साउंड सेंटर से उसके गर्भ के भ्रूण का लिंग परीक्षण करवाया। गर्भ में लड़की बताने पर ससुराल परिवार ने उसका गर्भ गिरवा दिया।
इस घटना की सूचना के बाद सिविल सर्जन फरीदकोट ने मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया था। टीम की रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने दोनों महिला डाक्टरों और चारों ससुरालियों पर पीएनडीटी एक्ट के तहत अदालत में शिकायत देकर उन्हें सजा देने की मांग की थी।
इस मामले में सीजेएम की अदालत से सजा होने के बाद इन लोगों ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी जिसे सोमवार को अदालत ने मंजूर कर लिया है।