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वैट में संशोधन पर भड़के व्यापारी

Fri, 18 Jul 2014 10:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
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वैट के 13 (1) में संशोधन को लेकर व्यापारियों का गुस्सा भड़क गया है। शुक्रवार को जालंधर इंडस्ट्रियल ट्रेडर्स एक्शन कमेटी की एक मीटिंग में जिले के व्यापारियों ने पंजाब सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। इस दौरान सरकार वैट में 13 (1) में किए हुए संशोधन को वापस ले वरना व्यापारी जालंधर में दो नंबर में खरीद-फरोख्त करेंगे और सरकार को वैट व टैक्स देना बंद कर देंगे। 30 जुलाई तक वैट को लेकर भरने वाली रिटर्न भी जमा नहीं करवाई जाएगी। व्यापारियों ने कड़े तेवरों में कहा कि सरकार से जो बनता सकता है करे, हम लाठियां खाने से लेकर सड़कों पर लेटने के लिए तैयार हैं।
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जालंधर इंडस्ट्रियल ट्रेडर्स एक्शन कमेटी की मीटिंग में करीब 100 व्यापारिक जत्थेबंदियों के नेता शरीक हुए। इस दौरान व्यापारियों ने सरकार को जमकर कोसा। एक्शन कमेटी के रविंदर धीर और गुरशरण सिंह ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के नेता व विधायक व्यापारियों का खून चूस रहे हैं। बाद में तमाम व्यापारिक जत्थेबंदियों के प्रतिनिधियों ने हाथ उठाकर प्रस्ताव पास किया कि अगर सरकार ने 13 (1) में संशोधन को वापस न लिया तो एक सप्ताह बाद जालंधर का कोई भी व्यापारी टैक्स अदा नहीं करेगा। सारा माल दो नंबर में लाकर बेचा जाएगा, सरकार जो कर सकती है उसके लिए दरवाजे खुले हैं।



इसके बाद व्यापारी सड़कों पर आएंगे और विधायकों से लेकर मंत्रियों तक के घरों का घेराव किया जाएगा। इस दौरान होलसेल शुगर के प्रधान प्रीतम सिंह, महासचिव कृष्ण लाल, जालंधर आयरन स्टील मर्चेंट के चौ. राम कुमार, पंजाब लैदर फेडरेशन के प्रधान लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस पाल, इलेक्ट्रानिक्स मार्केट के प्रधान गुरमीत सिंह बिट्टू, स्पोर्ट्स फोरम व खेल संघ के विपिन प्रिंजा और जालंधर ट्रेडर्स के राजकुमार बग्गा समेत बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।
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सरकार हरियाणा में व्यस्त, व्यापारी त्रस्त
व्यापारी नेताओं गुरशरण सिंह और धीर ने कहा कि पंजाब सरकार हरियाणा में व्यस्त है, उनको पंजाब के व्यापारियों का भी ख्याल करना चाहिए। वह हरियाणा में एचजीसीपी को लेकर शोर मचा रहे हैं, यहां व्यापारी परेशान हैं। पंजाब की अफसरशाही बेलगाम हो चुकी है। भाजपा विधायक नींद में हैं। एक साल पहले डिप्टी सीएम ने जो वादे किए थे, एक भी पूरा नहीं किया गया।



क्या है वैट एक्ट 13 (1)
वैट एक्ट में अभी हाल ही में संशोधन किया गया है। इसके अनुसार व्यापारी अभी अपने गोदाम या फैक्टरी में पड़े माल पर खरीदते समय वैट अदा करेंगे लेकिन यह वैट रिफंड तभी होगा जब वह माल सेल हो जाएगा। अगर माल साल भर बिक नहीं पाया तो व्यापारी अपना क्लेम नहीं कर पाएगा। व्यापारियों का तर्क है कि सरकार हमको उलझा रही है, हम वैट रिफंड लेने के तो हकदार हैं।



दूसरा, हमें चार चरणों का ब्यौरा देना पड़ रहा है। बेचने वाली पार्टी ने माल कहां से खरीदा, उसकी अगली पार्टी ने कहां से और उसकी अगली ने कहां से खरीदा। व्यापारियों ने कहा कि हम दुकान पर बैठकर कोई माल खरीदते हैं तो हम पिछली चार पार्टियों का ब्यौरा कैसे जुटा सकते हैं। यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का रास्ता है।
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