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पत्नियों, बच्चों को खाना देकर भूख से मरे चारों पुरुष

Fri, 28 Jun 2013 03:14 PM IST
डॉ. सुरेंद्र धीमान
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उत्तराखंड स्थित चार धाम यात्रा पर गए हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस पी. राघवेंद्र राव के समधी, समधिन और 13 अन्य रिश्तेदारों में से सभी चारों पुरुष अपनी पत्नियों और बच्चों को खाना, बिस्कुट देकर जिंदा रखते रहे और खुद भूख से मर गए। समधी, समधिन अभी भी लापता हैं।
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बेटी और दामाद के साथ चार दिन तक उत्तराखंड के सभी बचाव स्थानों पर समधी, समधिन को ढूंढने गए पी. राघवेंद्र राव बुधवार को चंडीगढ़ लौटे।

उन्होंने अमर उजाला के साथ बात करते हुए बताया कि विशाखापटनम से समधी, समधिन, समधी की दो बड़ी बहनें, बहनों के तीन बेटे, उनकी पत्नियां और तीन बेटियां, समधी का एक भतीजा और उसकी पत्नी कुल 15 लोग एक ट्रेवल एजेंसी के जरिए प्रति व्यक्ति 25000 रुपये की दर से चार धाम यात्रा के लिए 9 जून को चले थे और 21 जून को लौटना था।

इसमें हवाई टिकट, रहना, खाना आदि शामिल था। दिल्ली से 25 सीटर बस में सफर शुरू किया था। सभी 15 लोग 14 जून को केदारनाथ से गौरीकुंड के बीच रामबाड़ा के पास पहुंचे थे कि अचानक सैलाब आया।
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समधी, समधिन एक दुकान में बचने के लिए घुस गए और शेष ऊपर की तरफ पहाड़ पर चढ़ गए। दुकान का सामान बह गया और समधी, समधिन का आज तक पता नहीं चला।

समधी तीन भांजे और एक भतीजे श्यामाप्रसाद (40), सीताराम स्वामी (45), के. रामा राव (42), नारायण राव (35) अपने साथ अन्य महिला सदस्यों के साथ पहाड़ पर रहे। ठंड बढ़ने लगी, भूख और प्यास बढ़ने लगी। ग्रुप के पास खाने-पीने को ज्यादा नहीं था।

चारों पुरुषों ने खुद कुछ नहीं खाया और सारा सामान दो बुजुर्ग महिलाओं, चारों पत्नियों और तीनों बेटियों को देते रहे। इस उम्मीद में रहे कि कोई बचाव के लिए आएगा। चार दिन में एक-एक कर चारों पुरुषों की मौत हो गई।

एक बुजुर्ग महिला आदि लक्ष्मी (70) भी मर गई। तीन बेटियों समेत पांच महिलाएं बचीं मगर हिंदी नहीं आती थी। शवों के पास बैठी रहीं। पास में गुजर रहे एक व्यक्ति से किसी तरह मोबाइल मांगा तो उसने सिर्फ एसएमएस करने को कहा। तब उन्होंने विशाखापटनम में एसएमएस से अपनी उपस्थिति की जानकारी दी।

चार दिन तक महिलाएं चिल्लाती रहीं। उनका शोर सुनकर आईटीबीपी और एनडीआरएफ के जवान वहां पहुंचे। उन्होंने कहा कि लाशें वहीं छोड़ दो। अपने चारों पुरुषों और एक महिला के शव को वहीं छोड़ दिया।
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जवानों ने उन्हें रस्सों के सहारे नीचे उतारा और हेलीकॉप्टर से देहरादून पहुंचाया। वहां से 25 जून शाम को वे विशाखापटनम पहुंची और अस्पताल में दाखिल हुईं।
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