फरीदकोट की जिला व सेशन जज अर्चना पुरी की अदालत ने मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (एमईएस) के दो कर्मचारियों को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में 5-5 वर्ष की दोहरी सजा सुनाई है।
दोषी एमईएस के प्लंबर लीलू राम और कारपेंटर भोला सिंह को थाना कोतवाली पुलिस ने 8 अक्तूबर 2011 को गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया था।
पुलिस के अनुसार दोनों पिछले कुछ समय से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में थे। वह सेना की यूनिटों की अहम जानकारी आईएसआई को भेजते थे।
गिरफ्तारी के समय पुलिस ने दोषियों से दो सिम कार्डों समेत सेना की यूनिट की मूवमेंट, खुफिया हथियारों व आपरेशनों के संदर्भ में लिखित जानकारी पर आधारित किताब व छावनी क्षेत्र का एक नक्शा भी बरामद किया था।
दोनों कर्मी एमईएस कालोनी में ही रहते थे और अक्सर ही उनका रिपेयर आदि के लिए छावनी क्षेत्र में आना जाना लगा रहता था।
दोनों को छावनी के चप्पे-चप्पे की जानकारी थी और वह पाक एजेंसी के अफसर की हिदायत के मुताबिक छावनी से जानकारी जुटाकर उसे विभिन्न तरीकों से भेज रहे थे। जिला अदालत ने दोनों को ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट और आपराधिक साजिश रचने का दोषी करार देते हुए 5-5 वर्ष की कैद की सजा सुनाई। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी