फरीदकोट अदालत पहुंचे पूर्व आईजी परमराज सिंह उमरानंगल।
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फरीदकोट के बरगाड़ी बेअदबी मामले से संबंधित कोटकपूरा गोलीकांड घटना में निलंबित आईजी परमराज सिंह उमरानंगल ने शुक्रवार को फरीदकोट की अदालत में पेश होकर अपना नारको टेस्ट करवाने पर सहमति जताई। पिछली सुनवाई के समय अपने वकील के माध्यम से लिखित रूप में सहमति जता चुके उमरानंगल ने शुक्रवार को निजी तौर पर पेश होकर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक नारको टेस्ट करवाने के लिए तैयार होने की बात कही।
मामले की जांच कर रही पंजाब पुलिस की एसआईटी ने कुछ दिन पहले ही फरीदकोट की अदालत में लिखित रूप से आवेदन देकर इस मामले में राज्य के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, पूर्व एसएसपी मोगा चरणजीत शर्मा और निलंबित आईजी परमराज सिंह उमरानंगल का नारको टेस्ट करवाए जाने का आग्रह किया था जिस पर अदालत ने तीनों पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया था।
पिछली सुनवाई के दौरान पूर्व डीजीपी व पूर्व एसएसपी ने नारको टेस्ट करवाने से इनकार कर दिया था जबकि निलंबित आईजी उमरानंगल सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक टेस्ट करवाने पर राजी हो गए थे। शुक्रवार को अदालत में पेश हुए आईजी उमरानंगल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह सभी जांच एजेंसियों को पूर्ण सहयोग दे रहे हैं और भविष्य में भी सहयोग जारी रहेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली एसआईटी के सदस्य आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने निजी रंजिश के चलते उन्हें इन घटनाओं में झूठा फंसाया है। ऐसे में सच्चाई सामने लाने के लिए आईजी कुंवर विजय प्रताप का भी नारको टेस्ट करवाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहिबल गोलीकांड की घटना के समय वह मौके पर भी मौजूद नहीं थे, इसके बावजूद उन्हें बहिबल गोलीकांड में भी आरोपी बना दिया गया है। कोटकपूरा गोलीकांड मामले की जांच कर रही एडीजीपी विजिलेंस एलके यादव की अगुवाई वाली एसआईटी ने फरीदकोट की अदालत में आवेदन देकर आरोप लगाया था कि यह तीनों पुलिस अधिकारी उन्हें जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं जिसके चलते उनका नारको टेस्ट करवाया जाना चाहिए जिसके बाद अदालत ने तीनों पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी करके उनसे जवाब तलब किया था।