एक महिला अपनी 7 साल की बच्ची के अचानक गिर जाने के बाद जब डॉक्टर के पास जाती है तो उसे बताया जाता है कि उसकी बच्ची को पहले स्तर का ब्लड कैंसर है। यह सुनते ही उक्त महिला के शरीर में डर की लहर दौड़ जाती है। उसकी बच्ची को कैंसर है, इस बात का विश्वास करना मुश्किल तो था, लेकिन उक्त महिला ने धैर्य और निडरता से काम लेते हुए अपनी बच्ची को इस बीमारी से छुटकारा दिलाया। इस 7 वर्षीय बच्ची ने खुद भी बड़ी ही निडरता के साथ इस बीमारी का सामना करते हुए इस जंग पर जीत प्राप्त की है।
बच्ची की माता परमिंदर कौर ने कहा, वह तो यही कहेंगी कि ऐसे बच्चों के इलाज के लिए सरकार को ज्यादा से ज्यादा मदद करनी चाहिए। अस्पताल में उन्होंने ऐसे बच्चे देखे हैं, जिनकी पारिवारिक स्थिति काफी कमजोर है और इलाज करवाने में काफी दिक्कत आती है। सरकार को इस बारे में जरूर कुछ न कुछ करना चाहिए। उन सभी बच्चों के माता-पिता जिनके बच्चों को कैंसर है, को बताना चाहती हैं कि वे घबराएं नहीं, कैंसर ठीक हो जाता है।
बच्चों में बढ़ते कैंसर के खतरे के बारे में डीएमसी अस्पताल की डॉ. श्रुति कक्कड़ का कहना है कि जब उन्होंने 2013 में डीएमसी ज्वाइन किया था तो उस वर्ष अस्पताल में कैंसर से पीड़ित 13 बच्चे दाखिल हुए थे। वर्ष 2021 में कैंसर से पीड़ित इन बच्चों की संख्या 68 हो गई, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों में यह बीमारी किस तरह से बढ़ती जा रही है। वर्ष 2022 में जनवरी माह में ही डीएमसी में 10 कैंसर पीड़ित बच्चे दाखिल हो चुके हैं। इस समय डीएमसी में कैंसर से पीड़ित 17 बच्चे दाखिल हैं, जिनकी उम्र 18 साल से कम है। बच्चों में बढ़ते कैंसर के बारे में डॉ. श्रुति कक्कड़ का कहना है कि हमारा लाइफ स्टाइल, प्रोसेस्ड और केमिकल युक्त फूड बच्चों में इसका कारण हो सकता है, लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक प्रूफ नहीं है। उनका कहना है कि वे केवल इतना कहेंगी कि बच्चों को प्रोसेस्ड और केमिकल फूड से बचाना होगा। साथ ही लाइफ स्टाइल में बदलाव लाकर इस बीमारी को हराना होगा। (संवाद)