महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना कानून का उल्लंघन करने के कारण केंद्र ने पंजाब सरकार को लताड़ लगाई है।
पंजाब करीब उन डेढ़ दर्जन राज्यों में शामिल है जिन्होंने मनरेगा लागू होने के पांच वर्ष तक भी बेरोजगारी भत्ते के नियम नहीं बनाए हैं।
केंद्र ने इन सरकारों को तुरंत नियम बनाकर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को सूचित करने को कहा है।
सूत्रों के अनुसार ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मुख्य सचिव और ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के प्रमुख सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि पंजाब ने मनरेगा कानून के तहत बेरोजगारी भत्ते के प्रावधान को ठीक से लागू करने के नियम बनाने हैं, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक नियम नहीं बनाए हैं।
100 दिन तक रोजगार बुनियादी अधिकार है
मनरेगा के तहत 100 दिन तक रोजगार का अधिकार बुनियादी अधिकार बन गया है।
जॉब कार्ड धारकों को मांगी गई तारीखों को रोजगार न देने पर राज्य सरकार पर यह जिम्मेदारी है कि संबंधित मजदूरों को पहले एक महीने के लिए दिहाड़ी का चौथा हिस्सा और उसके बाद के शेष 70 दिनों के लिए आधी दिहाड़ी बेरोजगारी भत्ते के तौर पर देनी होगी।
कैग को मिली जानकारी
केंद्र सरकार ने कहा है कि कंट्रोलर एंड आडिट जनरल (कैग) की परफार्मेंस आडिट आन मनरेगा 2013 की रिपोर्ट में इस बात की जानकारी मिली थी। इसलिए राज्य सरकार को तुरंत बेरोजगारी भत्ते संबंधी नियम बनाकर सूचित करना चाहिए।
केंद्र सरकार ने अब ऐसा साफ्टवेयर विकसित कर लिया है कि समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ते की राशि का अनुमान खुद ही लग जाएगा। मनरेगा की साइट से इस बारे में जानकारी ली जा सकती है।
इन राज्यों ने नहीं बनाए नियम
पंजाब के अलावा अन्य राज्यों में हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, असम, अरुणाचल प्रदेश, ओडिसा, राजस्थान, तमिलनाडु, मनीपुर और नागालैंड शामिल हैं।