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‘तुम्हारी तो हड्डियां ही भारत जानी चाहिए’

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पाकिस्तान की जेल में क्रूरता से मार दिए गए सरबजीत सिंह द्वारा पिछले साल जुलाई के अंत में अपने परिवार के नाम कुछ खत लिखे गए थे।
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इसमें उन्होंने वहां की जेल की हालत और अपनी स्थिति के बारे में बताया था और मदद की मांग की थी।

अमर उजाला को मिली इन पत्रों की प्रति के प्रमुख अंश हम यहां पाठकों के लिए रख रहे हैं:

यह पत्र बहन दलबीर कौर के नाम

एक बात आप भारत सरकार के नोटिस में ला देना कि यहां (जेल में) कुछ ऐसे मुलाजिम और अफसर हैं जो मुझे जहनी (दिमागी) टॉर्चर करते हैं। मुझे लगता है कि ये लोग मुझे पागल करना चाहते हैं या फिर जान से मारना चाहते हैं।

जितनी शराफत से मैं जेल में दिन गुजार रहा हूं वो मुझे पता है या फिर भगवान को।

आज 31 जुलाई 12 को डिप्टी समरा ने कहा है कि मंजूरी नई करवाओ। अब हम नई मंजूरी कैसे करवाएं ये तो हम ही जानते हैं। कृपया आप भारत सरकार के नोटिस में लाएं कि जेल कर्मचारी मेरे साथ सही बिहेव नहीं कर रहे।
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कभी कोई कहता है कि आराम से दिन गुजारो और कोई कहता है कि तुम्हारी तो हड्डियां ही भारत जानी चाहिए। (जेल) सुपरिंटेंडेंट नया आया है। उसका नाम मोहसन रफीक है।

जब से ये यहां पर आया है तब से हमारे हालात ठीक नहीं हैं। अब सवाल यह है कि क्या ज्युडिशियल कमेटी की इतनी वैल्यू भी नहीं है कि कमेटी मुलाकात की इजाजत दे और डिप्टी उसको कैंसल कर दे और कहे कि जाओ नई इजाजत लेकर आओ। इसलिए मैं कह रहा हूं कि दूतावास वालों को मुलाकात के लिए भेजो। सरकार से कहो कि दूतावास वाले मुलाकात करें।
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मैं आपके अलावा भारत सरकार और दूतावास के नाम भी पत्र लिख रहा हूं।
आपका भाई
सरबजीत सिंह


बेटी से कहा था कंप्यूटर सीखना

माई डियर पूनम
जीती रहो।
बेटा जी मुझे पता है कि आप बहुत प्यार करती हैं मुझसे लेकिन आज्ञा का पालन नहीं करतीं। यह दुख देने वाली बात है। मैंने जो कहा आपने उस पर अमल नहीं किया।

इसलिए आपको मैं फिर कहता हूं कि आप पढ़ाई करें और सब्जेक्ट इंगलिश में रखें ताकि इंगलिश सही हो जाए और साथ में कंप्यूटर भी करें क्योंकि आज का दौर कंप्यूटर का है।

आजकल कंप्यूटर की दुनिया है। अपना ख्याल रखना। अपनी मम्मी का ख्याल रखना और अपनी बुआ का आदर करना। अच्छा पत्र बंद करता हूं।
आपका पापा
सरबजीत सिंह
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