फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संगरूर में ढींढसा-सिंगला की साख दांव पर

Sun, 23 Feb 2014 01:54 AM IST
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
लोकसभा क्षेत्र संगरूर में मुकाबला एक बार फिर शिअद के सेक्रेटरी जनरल सुखदेव सिंह ढींडसा और पंजाब यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष विजय इंद्र सिंगला के बीच होने जा रहा है।
विज्ञापन


यहां से मौजूदा सांसद सिंगला हैं, जिन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव में ढींढसा को 40,872 मतों के अंतर से हराया था। शिअद ने ढींढसा को यहां से प्रत्याशी घोषित कर दिया है, जबकि कांग्रेसी उम्मीदवार की घोषणा अभी होनी है।

विजय इंद्र सिंगला ही यहां से कांग्रेस प्रत्याशी होंगे, यह लगभग तय है। लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सिंगला केंद्र सरकार में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए जहां क्षेत्र के लिए कैंसर अस्पताल लेकर आए, वहीं दिल्ली-संगरूर शताब्दी सहित महत्वपूर्ण शहरों के लिए कई नए रेल लिंक भी सांसद के रूप में उनकी पहली पारी का हिस्सा रहे।
विज्ञापन


बरनाला के स्पोर्ट्स स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक व स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सेंटर की स्थापना सहित संगरूर और बरनाला का जेएनएनयूआरएम-2 के तहत आना भी उनकी पांच बरस की उपलब्धियों में शामिल है।

दूसरी ओर, सुखदेव सिंह ढींडसा के पुत्र परमिंदर सिंह ढींढसा पंजाब सरकार में वित्त एवं योजना मंत्री हैं, जबकि उनका खुद का प्रभाव भी सरकार में काफी है। पिछले समय में दोनों पिता-पुत्र ने संगरूर लोकसभा क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में विकास पर विशेष ध्यान दिया है।

बड़ी तादाद में ग्रांट इस क्षेत्र में बांटी गई हैं। इसके साथ ही ढींढसा राज्यसभा सदस्य होने के नाते केंद्र में पंजाब के विभिन्न मुद्दों को उठाते रहे हैं। इस प्रकार दोनों ही दिग्गज अपने-अपने तरीके से लोगों पर प्रभाव छोड़ते हुए फिर से मैदान में हैं।

सुखदेव सिंह ढींढसा शिअद प्रधान महासचिव तथा पार्टी की मेनिफेस्टो कमेटी के चेयरमैन होने के नाते दल के अहम नेता हैं, तो सिंगला कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के करीबियों में से एक हैं।

विजय इंद्र सिंगला की अध्यक्षता में ही पंजाब यूथ कांग्रेस का चुनाव लोकतांत्रिक ढंग से करवाने की शुरुआत राहुल गांधी ने की थी। इस तरह दोनों ही पक्षों के दिग्गजों के इस सीट पर आमने-सामने होने की वजह से इस लोकसभा क्षेत्र की अपनी अलग सियासी अहमियत है।

बरनाला परिवार का असर
इस समय अकाली दल लौंगोवाल सुप्रीमो तथा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला के शिअद के साथ समझौते से संबंधित अटकलों का दौर जारी है। इसे आगामी लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

यदि ऐसा हो जाता है, तो यह शिअद प्रत्याशी को जरूर फायदा पहुंचा सकता है। वैसे अकाली दल लौंगोवाल साझा मोर्चा का मुख्य घटक दल है तथा इसके इससे अलग होने की संभावना काफी कम है।

9,31,468 ने किया था मतदान
2009 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 9,31,468 वोटरों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। इनमें से 4,97,676 पुरुष, जबकि 4,33,792 महिलाएं थीं। मतों की कुल संख्या 12,51,401 थी।

छह विधानसभा क्षेत्रों में थी सिंगला की लीड
पिछले आम चुनाव में सिंगला ने ढींडसा को संगरूर लोकसभा सीट के अधीन आते छह विधानसभा क्षेत्रों सुनाम, भदौड़, बरनाला, मलेरकोटला, धूरी और संगरूर में पछाड़ा था। तीन विधानसभा क्षेत्रों लहरा, दिड़बा और महल कलां में ढींडसा को लीड मिली थी।

विधानसभा चुनाव में आंकड़ा 5-4 का हो गया
2009 की तुलना में विधानसभा चुनाव 2012 में सीट पर चुनावी हालात में कुछ परिवर्तन हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस को 5, जबकि शिअद को चार सीटों पर कामयाबी मिली। इस समय बरनाला, भदौड़, धूरी, लहरा और महल कलां से कांग्रेस, जबकि दिड़बा, संगरूर, मलेरकोटला व सुनाम से शिअद के विधायक हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें