मुक्तसर। शरारती तत्वों और गुंडा अनसरों से परेशान जय श्री राम चरित मानस मंच ने इस बार रामलीला का मंचन न करने का फैसला किया गया है।
इससे फाटक पार एरिया में पड़ते टिब्बी साहिब और जलालाबाद रोड निवासी रामलीला का मंचन नहीं देख सकेंगे।
पांच वर्ष पूर्व इस मंच का गठन हुआ था। कलाकारों के भावपूर्ण मंचन तथा आकर्षक सैट की बदौलत पांच वर्षों में यह रामलीला बेहद लोकप्रिय हो गई थी।
बदलते परिवेश में रामलीला के प्रति बेशक दर्शकों का रुझान कम हो गया है। फिर भी अभी भी सैकड़ों दर्शक इस रामलीला के सैट पर कलाकारों का अभिनय देखने दूर-दूर से आते हैं, लेकिन इस बार रामलीला मंच के रामलीला का मंचन न करने के फैसले से लोगों में निराशा है।
श्री राम चरित मानस मंच की ओर से प्रस्तुत रामलीला में कलाकारों की पारिवारिक सदस्य महिलाएं और युवतियां ही महिला किरदारों को निभाती आई हैं। रामलीला के दौरान मंच को पूरी तरह से पुलिस प्राटेक्शन न मिल पाने के कारण शरारती तत्व रामलीला के मंचन दौरान युवतियों पर फब्तियां कसने से बाज नहीं आते।
ऐसे में हर बार छेड़खानी तथा मारपीट की घटनाएं होती रहती है। इसी बात से आहत मंच ने इस बार रामलीला का मंचन न करने का फैसला किया है।
जय श्री राम चरित मानस मंच के चीफ आर्गेनाइजर दलीप कुमार दुल्ला, डायरेक्टर राजेश कुमार कुक्कू तथा अध्यक्ष बलदेव तेरिया ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि रामलीला के मंचन दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा पूर्ण सहयोग नहीं दिया जाता। हर बार पुलिस प्राटेक्शन के नाम पर महज दो पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है और वह भी मुख्य द्वार पर बैठ खानापूर्ति कर चलते बनते हैं।
जबकि रामलीला पंडाल के भीतर अक्सर ही शरारती तत्व देवियों के स्वरुप में सजी महिलाओं और युवतियों पर फब्तियां कसते रहते हैं। डायरेक्टर राजेश कुक्कू के अनुसार वह हर बार रामलीला का मंचन शुरू करने से पहले पुलिस को पूरी प्राटेक्शन देने के लिए गुहार लगाते रहे हैं। मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। जिस पर आहत होकर इस बार उन्होंने पुलिस प्राटेक्शन मांगने की बजाए रामलीला का मंचन न करना ही बेहतर समझा।
मंचन में भी हाईटैक प्रणाली का इस्तेमाल
जय श्री राम चरित मानस मंच की खासियत यह भी रही है कि रामलीला के मंचन के साथ-साथ जागरण भी होता था। सुंदर तथा मनमोहक झांकियां दिखाई जाती हैं।
रामलीला के मंचन में भी हाईटैक प्रणाली का इस्तेमाल होता था। जिसे देखने के लिए दर्शक दूर-दूर से आते थे। रामलीला के मंचन दौरान कलाकारों जीवंत प्रस्तुत से समां बांध देते हैं।