आरक्षण के बावजूद सीट पर बैठने की जगह नहीं मिली तो रेलवे को 34 हजार रुपए का जुर्माना भरना पड़ा।
मामला चार साल पहले का है। पंजाब के अबोहर की छात्रा श्रुति ने 30 मई 2009 को नई अबोहर से दिल्ली के लिए तीन सीटें आभा एक्सप्रेस के एस-4 कोच में बुक की थीं।
उस दिन आभा एक्प्रेस में एस-5 कोच नहीं लगाया गया था और इसी के चलते एस-5 के सारे लोग एस-4 में बैठ गए थे।
एस-4 में जिन लोगों की टिकट बुक थी उनकी बात सुनने के बजाए टीसी इधर-उधर हो गया। इससे श्रुति व परिवार की दो बुजुर्ग महिलाओं को सारी रात खड़े होकर 371 किलोमीटर लंबा सफर तय करना पड़ा।
श्रुति ने उपभोक्ता आंदोलन के चेयरमैन सतपाल खारीवाल के माध्यम से फिरोजपुर स्थित स्थाई लोक अदालत (जन सेवाएं) में शिकायत दर्ज करवाई।
इस मुकदमे में अदालत ने रेलवे की दलीलों को नकारते हुए मामले को उनकी सेवाओं में कमी माना। पीड़िता को मानसिक परेशानी पर 25 हजार जुर्माना, यात्रा की तिथि से 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया। फिरोजपुर की अदालत में रेलवे ने 34248 रुपये का चेक जमा करवा दिया।