पंजाब का लोकसभा चुनाव इस बार कांग्रेस के लिए बेहद अहम हो गया है। यह पहला मौका है जब चुनाव का नतीजा पार्टी के कई दिग्गजों का भविष्य तय करेगा।
जैसे-जैसे मतगणना की तिथि (16 मई) नजदीक आ रही है, कांग्रेसियों के दिलों की धड़कनें भी तेज होती जा रही हैं। कांग्रेस के सभी गुटों की नजरें चुनाव परिणाम पर लगी हैं।
कांग्रेस के प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा पिछली बार भी लोकसभा चुनाव जीते थे, लेकिन यह चुनाव उनके लिए बेहद अहम हो गया है।
चुनाव प्रचार के दौरान बाजवा ने खुद को भावी सीएम प्रोजेक्ट करते हुए माझा के विकास के लिए वोट मांगे थे।
अगर बाजवा हारते हैं तो उनका यह दावा कमजोर हो सकता है, लेकिन प्रधानगी पर खास असर पड़ता नहीं दिख रहा है। क्योंकि दूसरे राज्यों के प्रदेश प्रधान भी हारे, तो बाजवा को फर्क नहीं पड़ेगा।
अगर कांग्रेस पंजाब से ज्यादा सीटें जीत गई तो क्रेडिट जरूर बाजवा को मिलेगा। नतीजों पर कैप्टन अमरिंदर सिंह गुट की नजरें भी लगी हुई हैं।
कैप्टन अगर अरुण जेटली को हरा देते हैं तो पार्टी में उनका कद बढ़ेगा। साथ ही अगले विधानसभा चुनाव में वह सूबे में पार्टी के नेतृत्व के भी दावेदार होंगे।
कैप्टन और बाजवा, दोनों के ही जीतने या हारने पर समीकरण नहीं बदलेंगे। पर एक जीता और दूसरा हारा तो पार्टी में समीकरण जरूर बदलेंगे।
अंबिका सोनी हारीं तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, अगर वह जीत जाती हैं तो अहमद पटेल के मुकाबले राष्ट्रीय राजनीति में उनका कद बढ़ेगा। सुनील जाखड़ का कद भी जीतने के बाद पार्टी में ऊंचा होगा।
जाखड़ जीते तो होगी सीएलपी के लिए दौड़
फिरोजपुर से पार्टी उम्मीदवार सुनील जाखड़ अगर जीत जाते हैं तो सीएलपी लीडर के अहम पद के लिए कांग्रेस में दौड़ शुरू हो जाएगी।
मौजूदा हालात में इस पद के लिए दो प्रमुख दावेदार हैं, जिनमें रजिंदर कौर भट्ठल और लाल सिंह शामिल हैं। पार्टी ने पिछले दिनों जिस तरह भट्ठल को कैंपेन कमेटी का चेयरपर्सन बनाया, उससे उनकी दावेदारी ज्यादा मजबूत लग रही है।
कई सीटों पर आएंगे नए दावेदार
कांग्रेस ने इस बार चार मौजूदा विधायकों को लोकसभा चुनाव में उतारा है। जिनमें कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़, जोगिंदर सिंह पंजगराईं, साधू सिंह धरमसोत शामिल हैं।
इनके जीतने के बाद इनकी सीटों से नए दावेदारों पर अभी से चर्चा शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा कैप्टन की परंपरागत पटियाला शहरी सीट को लेकर है।
कैप्टन के जीतने के बाद उनका वारिस कौन हो सकता है, इसे लेकर कांग्रेसियों में चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि उस स्थिति में रणइंदर सिंह अपने पिता की सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।