लोकसभा चुनाव के दौरान पंजाब में गठबंधन का प्रदर्शन आशानुरूप न रहने के बाद गठित हुई भाजपा समीक्षा कमेटी ने इसके लिए अकाली नेताओं के रवैये को ही मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
यूं तो प्रदेश की 13 में से 7 लोकसभा सीटों पर गठबंधन प्रत्याशियों को मिली हार का ठीकरा शुरू से ही भाजपा नेता शिअद के सिर फोड़ते आ रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अब समीक्षा कमेटी की रिपोर्ट ने भी इस पर मोहर लगा दी है।
साथ ही पंजाब भाजपा नेताओं के कामकाज में कमी निकालते हुए उसमें सुधार के लिए भी कहा गया है, लेकिन मोटे तौर पर शिअद को ही गठबंधन के खिलाफ बने माहौल के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि जहां हालात में बदलाव के लिए शिअद से आम लोगों से जुड़े मसलों पर दो-टूक बात की जाए, वहीं भाजपा नेताओं को भी अपनी कमियों को दूर करने के लिए कहा जाए।
इस सबके बीच पंजाब भाजपा से संबंधित मंत्रिमंडल या संगठनात्मक बदलाव से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
इन मुद्दों पर चर्चा के बाद हुई रिपोर्ट तैयार
समीक्षा कमेटी ने विचार-विमर्श के दौरान विभिन्न मुद्दों पर गहन चिंतन किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार कमेटी ने व्यापार-उद्योग को राजस्व का मुख्य साधन मानते हुए इन पर लगे टैक्स, रेत-बजरी पर माफिया का कब्जा, अकाली नेताओं की स्थानीय स्तर पर मनमानियां, कॉलोनियों की रुगुलराइजेशन के लिए फीस वसूलने के बावजूद लोगों को आधारभूत सुविधाएं मुहैया न करवा पाना, सुविधा केंद्रों पर हर काम की फीस वसूल किया जाना, मैरिज पैलेसों पर लगाए गए भारी-भरकम टैक्स तथा शहरियों पर लागू किया गया प्रॉपर्टी टैक्स ही मुख्य रूप से गठबंधन की इस हालत के लिए जिम्मेदार रहे। बेशक सरकार में दोनों पार्टियां बराबर की सहयोगी हैं, लेकिन कमेटी की राय यह रही कि लोगों के बीच मोटे तौर पर यह मैसेज है कि चलती तो अकालियों की है।
कमेटी की रिपोर्ट के अन्य बिंदु
रिपोर्ट सौंपी जाएगी प्रदेश भाजपा प्रभारी शांता कुमार को
अकाली नेताओं के रवैये के प्रति लोगों में था गुस्सा
आम लोगों से जुड़े मसलों पर शिअद से दो टूक बात करने की सिफारिश
भाजपा संगठन व नेताओं की कमियों की तरफ भी इशारा
पार्टी स्तर पर भी बदलाव की संभावना