गांव सिंघांवाला में 220 केवी के पावर ग्रिड के तार डालने पर विवाद खड़ा हो गया है। 10 मई को दोपहर के समय आई आंधी से तारों में स्पार्किंग हो गई थी, जिससे ग्रिड का एक ट्रांसफार्मर और कंट्रोल रूम जलकर खाक हो गया था। पिछले सात दिन से करीब सौ लोग यहां काम पर लगे हुए हैं। ग्रिड से 11 केवी के तार डाले जाने हैं और यह तार किसानों के खेतों से गुजरनी है। मगर किसान इसके लिए राजी नहीं हो रहे। इस कारण शनिवार को पूरा दिन बिजली कर्मियों और ग्रामीणों के बीच तनातनी का माहौल बना रहा। इस दौरान तहसीलदार और पुलिस अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे।
दस मई को लगी आग के बाद विभाग ने कंट्रोल रूम के 11 केवी के 9 कंट्रोल पैनल ठीक कर दिए हैं। इनसे तार डाले जाने हैं, जिससे शहर को सप्लाई दी जानी हैं। यह तार किसानों के खेतों में से होकर जाने हैं। इसलिए किसान इसका विरोध कर रहे हैं। दोपहर के समय कर्मचारी तार डालने का काम शुरू करने लगे तो किसानों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उन्हाेंने बिजली कर्मियों को खेत में ही नहीं घुसने दिया और कहा कि अगर ऐसा किया तो इसका अंजाम बुरा होगा। सूचना मिलते ही तहसीलदार लखवीर सिंह, एक्सईएन चरणजीत सिंह मान और थाना चड़िक प्रभारी सब इंस्पेक्टर जगदीश लाल मौके पर पहुंचे और किसानों से बात की। मगर कोई हल नहीं निकला है और काम बंद कर दिया गया।
किसान संदीप सिंह, बलजिंदर सिंह, गुरमीत सिंह और परमजीत सिंह ने कहा कि यह तार हमारे लिए मौत की सजा जैसी हैं। पता नहीं कब स्पार्किंग हो जाए और आग लग जाए। संदीप ने बताया कि एक बार तो उसके पिता खेत में काम कर रहे थे कि ऊपर तारों में स्पार्किंग हो गई और बिजली की चिंगारियां गिरने लगीं। उसके पिता बाल-बाल बचे। हाल ही में हुई आगजनी से उनके खेत में पड़ा नाड़ जल गया था और बड़ी मुश्किल से आग पर काबू पाया था। अगर स्पार्किंग कुछ दिन पहले होती तो उनकी गेहूं की फसल जल जाती।
किसानों ने कहा कि अगर प्रशासन की ओर से हमारे खेतों से तार निकालने की कोशिश की तो वह संगठनों के सहयोग से इसका विरोध करेंगे और जरूरत पड़ी तो चेयरमैन पावर कारपोरेशन से मिलकर बात रखी जाएगी, हल नहीं होने पर धरने प्रदर्शन किए जाएंगे। वहीं एक्सईएन चरणजीत सिंह मान ने बताया कि यह ग्रिड 1988 में बना था। तब भी यहीं से तार खींचे गए थे। ऐसे में किसानों की चिंता बेबुनियाद है।