पंजाबी के जाने-माने गीतकार गिल सुरजीत का शनिवार को पटियाला में निधन हो गया। वे 74 साल के थे। शहर पटियाले दे मुंडे मुंछ फुट गबरू ने सोहने गीत से उन्होंने खूब प्रसिद्धि पाई थी। सुरजीत कुछ समय से बीमार थे।
उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए साहित्य अकादमी अवार्डी एवं पंजाबी साहित्य सभा पटियाला के प्रधान डा. दर्शन सिंह आशट ने कहा कि गिल सुरजीत ने पंजाबी गीतों को अनूठी सभ्याचारक पहचान प्रदान की। उनका जन्म चार अगस्त 1948 को मोगा के गांव लुहारा में हुआ था। सभी के पसंदीदा इस गीतकार के गीत सुरिंदर कौर, सुरिंदर छिंदा, जसपिंदर नरूला, गुरमीत बावा, अमर नूरी, रंजना, महिंदर कपूर, सुरेश वाडेकर और पम्मी बाई जैसे नामचीन गायकों ने गाए। मेला मुंडे कुडियां दा, वंगां दी छनकार, झांजर का छनकाटा, चेते कर बचपन गिल सुरजीत की प्रसिद्ध गीत पुस्तकें हैं। कुछ समय पहले पंजाबी साहित्य सभा की ओर से गिल सुरजीत की एक और नई पुस्तक चीरे वालिया गबरूआ का विमोचन किया गया था। पटियाला प्रशासन की ओर से उन्हें विशेष सम्मान दिया गया था। उन्हें कल्चरल अवार्ड और प्रोफेसर मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन लुधियाना की ओर से नंद लाल नूरपुरी अवार्ड समेत अन्य कई महत्वपूर्ण सम्मान भी मिले थे। इन दिनों वे पटियाला के घुम्मन नगर में रह रहे थे।