पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी एक तरफ फीस बढ़ाने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विभिन्न छात्र संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यूनिवर्सिटी ने फीस बढ़ाई तो वे इसका पुरजोर विरोध करेंगे। अध्यापकों, मुलाजिमों और पेंशनरों पर आधारित ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) ने भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अगर पंजाब सरकार यूनिवर्सिटी को वित्तीय संकट से निकालना चाहती है, तो फीस बढ़ाने के बजाय, ग्रांट जारी करें। सांझा विद्यार्थी मोर्चा के वरिंदर ने कहा कि उच्च शिक्षा मंत्री तृप्त राजिंदर बाजवा ने यह कहते हुए फीस बढ़ाने की बात कहीं कि इससे पीयू का आर्थिक संकट खत्म होगा। हालांकि सवाल यह उठता है कि क्या फीस बढ़ाने से पीयू का आर्थिक संकट खत्म हो जाएगा। पीयू एक पब्लिक सेक्टर यूनिवर्सिटी है। इसका मकसद छात्रों को सस्ती और अनिवार्य शिक्षा देना है। वहीं, अगर यूनिवर्सिटी की फीस बढ़ाई गई तो गरीब छात्र उच्च शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। जेएसी में धरना दे रहे डॉ. राजदीप सिंह ने कहा कि फीस बढ़ाना न तो छात्रों के हित में होगा और न ही अध्यापकों के हित में। यूनिवर्सिटी की फीस पहले से ही काफी ज्यादा है। साल 1992 के बाद छात्रों की फीस में 150 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। जबकि ग्रांट में वृद्धि केवल सात गुना हुई है।