मनोरंजन कालिया व सांसद परनीत कौर।
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भाजपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ नेता मनोरंजन कालिया ने केंद्रीय बजट 2021-22 को नए भारत का प्रवेश द्वार बताया है। कालिया ने कहा कि यह बजट प्रगतिशील व दूरदर्शी बजट है, जो भारत की बढ़ती हुई अर्थवयवस्था को गति प्रदान करेगा। इस बजट में 75 साल के बुजुर्गों का और युवाओं का भी ख्याल रखा गया हैं, जो स्टार्ट-अप के माध्यम से उद्यमी बनने जा रहे हैं। कालिया ने कहा कि बजट में मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों का भी ख्याल रखा गया है।
उम्मीदों पर खरा उतरने वाला बजट
उम्मीदों पर खरा उतरने वाला बजट है। केंद्र सरकार ने इसको बेहद संतुलित ढंग से तैयार किया है। कोरोना महामारी के बावजूद कृषि, शिक्षा और उद्योग के लिए बेहतर बजट है। अभी मैंने ठीक ढंग से केंद्रीय बजट को पढ़ा नहीं है। पढ़ने के बाद बेहतर तरीके से इसके बारे में बता पाऊंगा। - अश्वनी शर्मा, अध्यक्ष, पंजाब भाजपा।
बजट में किसानों के कल्याण के दावे हास्यास्पद : परनीत
पटियाला से सांसद परनीत कौर ने कहा कि बजट में किसानों के कल्याण के दावे हास्यास्पद हैं। अगर केंद्र को किसानों की इतनी ही चिंता है तो कृषि कानूनों को तुरंत रद्द करे। ताकि इस कड़ाके की ठंड में दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसान वापस अपने घरों को लौट सकें।
लोगों ने क्या दी प्रतिक्रियाएं
विभिन्न वर्गों ने केंद्रीय बजट को बेहद कमजोर और किसी भी वर्ग को राहत न देने वाला बताया है। सरकारी स्कूल के अध्यापक कमलजीत सिंह के मुताबिक बजट बेहद निराशाजनक रहा। यह बजट आम लोगों के खिलाफ व विदेशी कारपोरेट के हितों को साधना वाला रहा। बजट के जरिये सरकार ने विदेशी कॉरपोरेटों के लिए देश की जनता को लूटने के दरवाजे खोल दिए हैं। साथ ही इस बजट में बेरोजगारी दूर करने की कोई ठोस योजना भी नहीं है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
व्यापारी राकेश गुप्ता के मुताबिक बजट में इंडस्ट्री को खड़ा करने के लिए केंद्र ने कोई विशेष पैकेज नहीं दिया। ऊपर से पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ा दिए। इससे व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा। व्यापार पूरी तरह से ठप पड़ जाएंगे।
कर्मचारी नेता हरी सिंह चमक के मुताबिक बजट में गरीबों के लिए कुछ नहीं है। बजट पहले ही मई 2020 में घोषित किए पैकेज का ही दोहराव है। हर एक चीज महंगी करने के साफ संकेत इस बजट में मिले हैं। वेतन भोगियों और मध्यम वर्ग के लिए टैक्स की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऊपर से प्रोविडेंट फंड के ब्याज को इनकम टैक्स के घेरे में लाकर भविष्य की बचत पर डाका मारा है।