-अघोषित कट और लो वोल्टेज की समस्या से लोग परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाब में शुक्रवार को विभिन्न थर्मल पावर प्लांटों के तीन यूनिट तकनीकी खराबी के चलते बंद रहे। इससे कुल 1080 मेगावाट की बिजली सप्लाई ठप रही, लेकिन पावरकाॅम के लिए राहत की बात यह रही कि पंजाब में विभिन्न जगहों पर बारिश के चलते तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इससे बिजली की मांग पहले के मुकाबले कम ही दर्ज की गई। माहिरों का मानना है कि अगर थर्मल प्लांटों के यूनिटों में तकनीकी खराबी का सिलसिला इसी तरह से चलता रहा, तो आने वाले दिनों में पावरकाॅम की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। खपतकारों को बिजली की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
शुक्रवार को रोपड़ थर्मल प्लांट का 210 मेगावाट की क्षमता का पांच नंबर यूनिट, तलवंडी साबो का 660 मेगावाट का तीन नंबर यूनिट बॉयलर ट्यूब में लीकेज के चलते बंद रहा। लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांट का 210 मेगावाट का दो नंबर यूनिट पहले से ही बंद है। इस तरह से कुल 1080 मेगावाट की बिजली सप्लाई ठप रही। इससे लोगों को अघोषित कट और लो वोल्टेज की समस्या का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 15094 मेगावाट दर्ज की गई, जबकि मानसून की आमद से पहले पंजाब में बिजली की मांग पिछले सारे रिकाॅर्ड तोड़कर 16000 मेगावाट को पार कर गई थी। शुक्रवार को पावरकाॅम को अपने सभी स्रोतों से करीब 4600 मेगावाट की बिजली हासिल हुई। इसमें से प्रमुख तौर पर पावरकाम को सरकारी थर्मल प्लांटों से पावरकाॅम को 1372 मेगावाट, प्राइवेट से 2114 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्टों से 848 मेगावाट बिजली प्राप्त हुई। पावरकाॅम ने तकरीबन 9500 मेगावाट बिजली एक्सचेंज से प्राप्त की।
कोयले का संकट बरकरार, तलवंडी में चार और गोइंदवाल में नौ दिनों का स्टाॅक बाकी
थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट भी बना हुआ है। तलवंडी साबो में मात्र चार दिनों का तो वहीं कुछ समय पहले पंजाब सरकार की ओर से खरीदे गोइंदवाल साहिब थर्मल प्लांट में मात्र 9 दिनों का कोयला शेष है, जबकि रोपड़ में 17 और लहरा मुहब्बत में 18 दिनों का कोयला है। तय मानकों के मुताबिक थर्मल में 27 से 28 दिन तक का कोयला होना जरूरी है। राजपुरा थर्मल में ही 28 दिनों का कोयला है।