अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पटियाला जिले में इस साल 30 हजार एकड़ रकबे पर धान की सीधी बुवाई की जाएगी। पिछले साल यह रकबा केवल 5500 एकड़ था। इस साल के तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए खेतीबाड़ी विभाग ने मुहिम छेड़ दी है। जिसके लिए खेतीबाड़ी विकास अधिकारियों की अगुवाई में छह टीमों का गठन किया गया है। यह टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को धान की सीधी बुवाई के फायदों के बारे में जागरूक करके उन्हें इसके लिए प्रेरित करेंगी। धान की सीधी बिजाई का पहला वेरीफिकेशन खेतीबाड़ी विभाग की ओर से 1 जुलाई 2025 से 15 जुलाई 2025 तक किसानों के खेतों पर जाकर किया जाएगा।
मुख्य खेतीबाड़ी अधिकारी डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि इस बार पूरी उम्मीद है कि तय लक्ष्य पूरा हो सकेगा। टीमों की ओर से किसानों को बताया जाएगा कि धान की सीधी बुवाई से जहां भू-जल की बचत होगी। धान की पनीरी की रोपाई पर आने वाला लेबर का खर्चा भी बचेगा। क्योंकि धान की सीधी बुवाई ट्रैक्टरों से हो जाती है। मुख्य खेतीबाड़ी अधिकारी ने बताया कि धान की सीधी बिजाई से 15-20 प्रतिशत पानी की बचत होती है और 10-12 प्रतिशत अधिक पानी रिचार्ज होता है। इसके साथ ही फसल रोगों के प्रति कम संवेदनशील होती है, जिसके परिणामस्वरूप धान की उपज अधिक होती है और पराली का प्रबंधन आसान होता है, क्योंकि खेत जल्दी खाली हो जाता है।
उन्होंने कहा कि धान की सीधी बिजाई मध्यम से भारी मिट्टी में लेजर कराहे के साथ खेत को समतल करके तथा बीजों को स्प्रिंट दवा से उपचारित करके तथा फिर लकी सीड ड्रिल का उपयोग करके करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के तुरंत बाद स्टॉम्प 30 ईसी का छिड़काव करें। एक लीटर घोल को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करना आवश्यक है तथा कुछ समय बाद जब खरपतवार 1-2 पत्ती अवस्था में हो जाए, तब विवाया 6 ओडी की 900 मिली मात्रा का छिड़काव करें। इसे 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि सूखी भूमि में पहली सिंचाई 4 से 5 दिन बाद तथा नमी वाली भूमि में पहली सिंचाई बुवाई के 15-20 दिन बाद करनी चाहिए।