लंबे इंतजार के बाद राजपुरा और तलवंडी साबो के थर्मल प्लांटों में कोयला पहुंच गया है। राजपुरा में दो दिनों का तो तलवंडी साबो में 9 दिनों का कोयला पहुंचा है। इस कोयले से राजपुरा प्लांट की 700 मेगावाट की एक यूनिट जो अभी तक 500 मेगावाट की क्षमता पर चलाई जा रही थी, उसे मंगलवार को 600 मेगावाट की क्षमता पर चलाया गया। इससे सूबे को 100 मेगावाट बिजली ज्यादा मिली।
राजपुरा प्लांट का दूसरा यूनिट कोयले की कमी के चलते अभी भी नहीं चल पाया है। वहीं तलवंडी साबो प्लांट के 660 मेगावाट की क्षमता वाले यूनिट के जल्द चालू होने की संभावना है।
लहरां मोहब्बत थर्मल प्लांट का करीब डेढ़ हफ्ते से बंद पड़ा यूनिट चालू नहीं हो पाया है। मंगलवार को बठिंडा प्लांट का भी एक यूनिट फाल्ट के चलते बंद पड़ गया। यह यूनिट 120 मेगावाट का था। हालांकि लहरां मोहब्बत का एक अन्य बंद पड़ा यूनिट आज चालू हो गया। मंगलवार को बिजली की डिमांड सोमवार के मुकाबले कम रही।
मंगलवार को डिमांड 11 हजार मेगावाट दर्ज की गई, जबकि इसकी तुलना में उपलब्धता 8800 मेगावाट रही। इस कारण खास तौर से गांवों में लोगों को चार से पांच घंटों के कटों का सामना करना पड़ा। किसानों को भी आठ घंटे के बजाय छह घंटे ही बिजली मिली। शहरों में आज कट कम रहे। शहरों में दो से तीन घंटे के कट लगे।
पावरकॉम के अधिकारियों के मुताबिक तलवंडी साबो थर्मल प्लांट जल्द शुरू हो सकता है, जिससे कट और भी कम होने की संभावना है। साथ ही उन्होंने कोयले की सप्लाई जल्द तेज होने की बात कही।
संकट के लिए सरकार जिम्मेदार
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रेसीडेंट इंजीनियर बलदेव सिंह सरां, महासचिव संजीव सूद ने कहा है कि पंजाब में पैदा बिजली संकट के लिए पावरकॉम मैनेजमेंट और पंजाब सरकार जिम्मेदार है। ये बिजली के लिए प्राइवेट सेक्टर के थर्मल प्लांटों पर निर्भर रही। अब इन प्लांटों में कोयले का संकट लोगों के लिए भीषण गरमी में कटों का सबब बन रहा है। नए प्राइवेट थर्मल प्लांट गोइंदवाल साहिब, राजपुरा और तलवंडी साबो अगर पूरी क्षमता पर चलें, तो पंजाब को 3920 मेगावाट बिजली मिल सकती है। जबकि इनमें से गोइंदवाल साहिब व तलवंडी साबो तो कोयले संकट के चलते बंद पड़े हैं। अकेले राजपुरा से ही 600 मेगावाट बिजली वर्तमान में मिल रही है।