अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाब में बुधवार को पराली जलाने के मामले 5100 के पार पहुंच गए। छह नए मामलों के साथ पराली जलाने के कुल केसों की गिनती बढ़कर 5101 हो गई है। इसी बीच मंडी गोबिंदगढ़ का एक्यूआई खराब श्रेणी में दर्ज किया गया, जो 221 रहा। इसके अलावा पांच शहरों का एक्यूआई यलो जोन में दर्ज किया गया। इनमें अमृतसर का एक्यूआई 182, जालंधर का 150, खन्ना का 139, पटियाला का 126 और लुधियाना का 128 दर्ज किया गया।
पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी तेजी के साथ की जा रही है। अब तक 2365 मामलों में एक करोड़ 24 लाख 80 हजार रुपये का जुर्माना किया जा चुका है जिसमें से 63 लाख 35 हजार रुपये की वसूली कर ली गई है। 1940 मामलों में एफआईआर हो चुकी है। 2154 रेड एंट्री की गई है। पराली जलाने में तरनतारन जिला 696 मामलों के साथ पहले नंबर पर और संगरूर 695 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर बना है। 548 मामलों के साथ जिला फिरोजपुर तीसरे स्थान पर है। इनके अलावा अमृतसर में पराली जलाने के कुल 315 मामले, बठिंडा में 369, मानसा से 306 मामले, मुक्तसर से 375, मोगा से 330, पटियाला से 235, कपूरथला से 136, लुधियाना से 218, फाजिल्का से 267, फरीदकोट से 132, बरनाला से 105, मालेरकोटला से 91, गुरदासपुर से 85, जालंधर से 86, फतेहगढ़ साहिब से 49, एसएएस नगर से 29, होशियारपुर से कुल 18 मामले सामने आ चुके हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक सेटेलाइट के जरिये खेतों में पराली जलाने के मामलों की मानीटरिंग का सिलसिला 30 नवंबर को थमने जा रहा है। इस बार पराली जलाने के मामलों में 50 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई है। यह पराली जलाने वालों पर बरती सख्ती व किसानों को लगातार जागरूक करने का परिणाम है। किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसानों के बारे में अवगत कराया गया है।