अंतरराष्ट्रीय सिंथेटिक ड्रग तस्कर सरगना जगदीश भोला की गिरफ्तारी के बाद पटियाला पुलिस ने आइस बनाने में इस्तेमाल किया जाने वाला 600 करोड़ रुपये का छह क्विंटल रसायन बरामद किया है।
अमृतसर के दवा फैक्ट्री मालिक जगजीत सिंह चाहल की निशानदेही पर पुलिस ने बद्दी स्थित एमबीपी फार्मास्युटिकल की फैक्टरी से यह बरामदगी की है।
एसएसपी हरदियाल सिंह मान का कहना है कि सिंथेटिक ड्रग रैकेट के मुख्य सरगना जगदीश भोला, उसके चार साथियों और आइस सिंथेटिक ड्रग बनाने में इस्तेमाल रसायनों के मुख्य सप्लायरों जगजीत सिंह चाहल और मनजिंदर सिंह औलख की गिरफ्तारी के बाद पटियाला पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है।
सुडोएफड्राइन और एफड्राइन से बनाते हैं आइस
पटियाला पुलिस ने शुक्रवार को छह क्विंटल सिंथेटिक और अन्य रसायन बद्दी स्थित सप्लायर जगजीत सिंह चाहल की फैक्टरी एमबीपी फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड से बरामद किया है।
बरामद रसायनों की मात्रा और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं जैसे स्टाक रजिस्टरों, रसायनों को फैक्टरी में रखने की मंजूरियां, तस्दीक करने के लिए सेहत विभाग के अधिकारियों को भी पुलिस ने अपने साथ जोड़ा है।
ये इन रसायनों की मेडिसिन की बजाय आइस जैसे ड्रग को बनाने के लिए गैरकानूनी इस्तेमाल की जांच के संबंध में जांच कर बताएंगे।
एसएसपी ने बताया कि पुलिस को मौके से चार क्विंटल सुडोएफड्राइन और एफड्राइन के अलावा इन रसायनों का दो क्विंटल मिक्सर बरामद किया है। इन रसायनों को आइस तैयार करने के लिए बनाकर रखा गया था।
एक से तीन करोड़ बनाने का खेल
एसएसपी ने बताया कि एफड्राइन, सुडो एफड्राइन और अन्य रसायनों की अनुमानित कीमत एक करोड़ रुपये प्रति किलो है, जबकि सिंथेटिक ड्रग आइस की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत पांच करोड़ रुपये है।
गैरकानूनी निर्माण प्रक्रिया में अंदाजन 60 फीसदी ऐसे रसायनों को आइस में बदला जाता है। एक किलो रसायन से 600 ग्राम के करीब आइस बनती है।
इसी तरह से अंदाजन एक करोड़ के निवेश पर तीन करोड़ रुपये मिल जाते हैं, जिनमें निर्माण मशीनरी और अन्य खर्चे शामिल नहीं हैं।
इतना बड़ा अंतर ही नशीले पदार्थों के तस्करों को सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण और बिक्री के लिए प्रोत्साहित करता है। एसएसपी ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच जारी है।