पंजाबी यूनिवर्सिटी के वनस्पति विज्ञान विभाग में हुए एक ताजा शोध के अनुसार भारत में लकड़ी से संबंधित फंगस की 38 नई प्रजातियां होने के बारे में तथ्य सामने आए हैं। डा. अवनीत पाल सिंह की अगुवाई में शोधकर्ता इलू राम की ओर से यह शोध हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के अधीन पड़ते क्षेत्र में लकड़ी से संबंधित फंगस की विभिन्न किस्मों की पहचान करने के मकसद से शुरू की गई थी।
शोधकर्ता इलू राम ने बताया कि इस शोध के दौरान संबंधित क्षेत्र की विभिन्न जगहों का सर्वेक्षण करने के बाद विभिन्न समय वहां दौरा किया गया। विभिन्न जगहों पर फंगस की विभिन्न किस्मों के 260 नमूने इकट्ठे किए गए। इसके बाद रिवायती व आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके इन विभिन्न किस्म की फंगस की पहचान या निशानदेही का काम किया गया।
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136 प्रजातियों के शामिल होने की पहचान
उन्होंने बताया कि इन तकनीकों के आधार पर इकट्ठा किए नमूनों में कुल 136 प्रजातियों के शामिल होने की पहचान हुई थी। पीयू ने शोध के मकसद से पहले से पहचानी जाती प्रजातियों के अलावा नई प्रजातियों के बारे में पहचान करने में सफल हुए हैं।
सात जीन्स भारत के लिए नए
शोध निगरान डा. अवनीत पाल सिंह ने कहा कि शोध नतीजों में यह सामने आया है कि इन इकट्ठा की प्रजातियों फंगस के सात जीन्स ऐसे थे, जो भारत के लिए नए थे यानी पहले इनके यहां होने के बारे में निशानदेही नहीं हुई थी। इसके अलावा फंगस का एक जीन्स ऐसा सामने आया कि जो हिमाचल प्रदेश के लिए नया था।
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शोध में इन जीनस के आधार पर भारत में पहली बार 38 नई फंगस प्रजातियों और हिमाचल प्रदेश में 11 नई प्रजातियों के होने के बारे में पुष्टि हुई है। डा. अवनीत पाल सिंह ने बताया कि यह शोध जहां वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में अगले स्तर की शोध का आधार बनेगी, वहीं इसकी मेडिकल या इलाज पद्धतियों के क्षेत्र में विशेष अहमियत है।
वाइस चांसलर प्रोफेसर अरविंद ने शोध टीम को बधाई देते कहा है कि विज्ञान के क्षेत्र में ऐसी उच्चस्तरीय शोधों के सामने आने से पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि वह खुद एक वैज्ञानिक होने के नाते और शिद्दत के साथ समझ सकते हैं कि ऐसी शोधों का विज्ञान के क्षेत्र में कितना महत्व है।