पंजाबी यूनिवर्सिटी में डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन (डीएसओ) के बैनर तले स्टूडेंट्स की ओर से शुरू किया दिन-रात का धरना जारी रहा। अभी तक स्टूडेंट्स की समस्याओं को लेकर यूनिवर्सिटी के किसी अधिकारी ने डीएसओ ओहदेदारों से बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिससे गुस्साए स्टूडेंट्स ने वीसी का पुतला फूंका और नारेबाजी की। इस मौके पर स्टूडेंट्स ने लड़कियों के हास्टल के बंद होने का समय कम करने का विरोध किया।
स्टूडेंट नेताओं ने कहा कि डीएसओ पिछले लंबे समय से लड़कियों के हास्टल के समय को बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रही है। इसके तहत डीएसओ की नाटक टीम ने जेल मैनुअल के नाम से बने नाटक का यूनिवर्सिटी के कोने-कोने में मंचन किया। इसके अलावा हास्टलों संबंधी स्टूडेंट्स की अन्य समस्याओं को लेकर भी हस्ताक्षर मुहिम चलाई गई।
इसमें 2000 से अधिक स्टूडेंट्स ने डीएसओ के साथ सहमति जताते हुए हस्ताक्षर किए। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने लड़कियों के हास्टल के समय में वृद्धि करने के बजाय उल्टा फैसला लेते हुए हास्टलों के बंद होने का समय पहले से भी कम कर दिया है। इसे लेकर स्टूडेंट्स में रोष है।
धरने को संबोधित करते हुए स्टूडेंट नेताओं अमरजीत बाजेके, सतवंत समराला, हरदीप भोलूवालिया आदि ने कहा कि यूनिवर्सिटी जैसे उच्च शिक्षण संस्थान जहां स्टूडेंट्स की जिंदगी, समाज, आजादी को समझते हैं, उन्हीं संस्थानों में लिंग के आधार पर भेदभाव किए जा रहे हैं। डीएसओ ने एलान किया कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी न की गई, तो शुरू किए दिन-रात के धरने को और तीखा करते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।