पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में दो दिवसीय चेयर पोएट्री संगत अंतरराष्ट्रीय कविता उत्सव का समापन हो गया। कार्यक्रम के दौरान कवियों ने डच, फ्रेंच, तिब्बती, संथाली, पंजाबी, हिंदी, इंग्लिश, असमी भाषाओं में अपनी कविताएं पेश कीं।
अगर हमने अपना स्तर बहुत ऊंचा न रखा होता, तो बहुत खुश होते इन लाइनों की लेखक डच भाषा की कवियत्री कीरा वुक समेत डच, फ्रेंच, तिब्बती, संथाली, पंजाबी, हिंदी, इंग्लिश, असमी भाषाओं के कवियों के साथ मिलकर पंजाबी यूनिवर्सिटी में लगातार दो दिनों तक पंजाबी यूनिवर्सिटी के पंजाबी विभाग और ईएमआरसी और भाषा विभाग पंजाब की तरफ से संस्था संगत पंजाब और चेयर पोएट्री इवनिंग्स कोलकाता के साथ मिलकर आयोजित इस उत्सव का मुख्य सेशन यूनिवर्सिटी साइंस ऑडिटोरियम में हुआ।
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इस सेशन में कीरा वुक, मेलानी लाबेले, तेनजिंग सुंडे, केवल बिनाबी, पी रमन, रॉबिन न्गोंग, चंद्र प्रकाश देवल, राकेश रंजन, निर्मला पुतुल मुर्मू, अंशुमान कार, पाल कौर, अदनान कफील दरवेश, प्रियंवदा सिंह इल्हान, गुरतेज कोहरवाला, अंबरीश, गुरप्रीत, अजीतपाल जटाना, बिपनप्रीत, नरिंदरपाल कौर, मुकेश आलम और अनु बाला ने अपनी कविताएं पेश कीं। संगत पंजाब संस्था के प्रेसिडेंट डॉ. सुरजीत सिंह ने कहा कि यह उत्सव भारतीय और विदेशी कवियों को एक प्लेटफॉर्म पर लाया है, जहां कई भाषाओं वाली कविताओं का आदान-प्रदान मुख्य आकर्षण रहा है। कवि स्वामी अंतर नीरव ने कहा कि बहुसभ्याचारक और बहु भाषाई स्वभाव के जश्न को मनाता यह उत्सव नई पीढ़ी के लिए साहित्यिक समझ का एक अहम प्लेटफॉर्म साबित होगा।
उत्सव डायरेक्टर सहजमीत ने कहा कि कवियों की पढ़ी गई कविताओं के पंजाबी और इंग्लिश ट्रांसलेशन भी पढ़े गए। अलग-अलग सेशन में कवि नीतू, सहजमीत, अलीशा और मंजीत ने स्टेज का संचालन किया।