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साझा विद्यार्थी मोर्चा को पीयू में फीसों की बढ़ोतरी नामंजूर, करेंगे संघर्ष

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पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी के सांझा विद्यार्थी मोर्चा ने यूनिवर्सिटी प्रशासन व पंजाब सरकार खिलाफ संघर्ष का एलान कर दिया है। शुक्रवार को मोर्चे से महासचिव वरिंदर ने बयान जारी कर बताया कि यूनिवर्सिटी की चंडीगढ़ में हुई सिंडीकेट मीटिंग में फीस बढ़ोतरी का फैसला हुआ है। जिसे विद्यार्थी जत्थेबंदियां नामंजूर करती हैं और इस फैसले के विरोध में सोमवार को बैठक करके संघर्ष की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
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चार स्टूडेंट जत्थेबंदियों पर आधारित सांझा विद्यार्थी मोर्चा के नुमाइंदों का कहना है कि फीसों में बढ़ोतरी करके पीयू प्रशासन ने स्टूडेंट्स की जेबों पर डाका डाला है। शिक्षा हर इंसान का बुनियादी हक है औरयह सरकार व प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों के लिए अनिवार्य व मुफ्त और वैज्ञानिक शिक्षा का अधिकार यकीनी बनाए, लेकिन लगता है कि पीयू प्रशासन यह भूल गया है। स्टूडेंट्स की फीसों से यूनिवर्सिटी नहीं चलाई जा सकती है, बल्कि सरकारों को आर्थिक मदद देनी होती है, जबकि ऐसा नहीं हो रहा है। छात्र नेताओं ने कहा कि फीसें बढ़ाने का फैसला लेकर पीयू प्रशासन ने यूनिवर्सिटी के निजीकरण का रास्ता साफ कर दिया है। साथ ही कहा कि पीयू कोई व्यापारिक संस्था नहीं है, बल्कि पंजाब खास करके मालवा के लोगों के लिए शिक्षा का मंदिर है। पंजाबी भाषा के प्रचार व प्रसार के लिए बनाई इस संस्था का निजीकरण करने की कोशिश करना स्टूडेंट्स के लिए खतरनाक है। साथ ही पंजाब, पंजाबी व पंजाबियत के लिए भी घातक साबित होगा।
इस मौके पंजाब सरकार से विशेष ग्रांट जारी करने और यूनिवर्सिटी के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी बंद करने की भी मांग की गई। फीसों में वृद्धि के फैसले को भी वापस लेने की मांग की गई। इस मौके छात्र नेताओं में राहुल, गुरजंट, प्रितपाल, अमृत, अमोलक व अन्य मौजूद रहे।
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