वीरवार को पटियाला में मांगों को लेकर सरकार खिलाफ अर्थी फूंक प्रदर्शन करते मुलाजिम।
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पटियाला में पंजाब सबआर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन और दि क्लास फोर्थ गवर्नमेंट इंप्लाइज यूनियन के आह्वान पर वीरवार को बड़ी गिनती में मुलाजिमों ने इकट्ठा होकर सरकार खिलाफ बाजारों से रोष मार्च निकाला। इसके बाद डीसी दफ्तर आगे पहुंच कर सिंचाई मंत्री की अर्थी फूंक प्रदर्शन किया। इस मौके पर सिंचाई विभाग के पुनर्गठन का विरोध किया गया।
मुलाजिम नेताओं दर्शन सिंह लुबाना, जगदीश सिंह चहल, रणजीत सिंह राणवा आदि ने कहा कि सरकार कोरोना की आड़ में मुलाजिम विरोधी फैसले ले रही है। जिसके तहत सिंचाई विभाग का पुनर्गठन कर दिया है। इस फैसले से पहले सरकार ने न तो विभाग के अधिकारियों की राय ली और न ही मुलाजिमों की सुनी। एक तरफा फैसला थोप दिया गया है। इस फैसले के तहत विभाग के करीब 24 हजार पदों को घटाकर 15606 कर दिया गया है। क्षेत्रीय दफ्तरों में से करीब 301 क्लर्कों के पद समाप्त कर दिए गए हैं। 50 फीसदी पद चौथा दर्जा मुलाजिमों के खत्म कर दिए हैं। मौत केसों में तरस के आधार पर नियुक्तियों की व्यवस्था लगभग समाप्त कर दी गई है। ऊपरी स्तर पर एसडीओ के और जूनियर इंजीनियरों के पद भी घटा दिए गए हैं। सरप्लस मुलाजिमों को कहां भेजा जाएगा, इस संबंधी भी कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया है। जिस कारण अक्तूबर में यह सारे कर्मचारी अपने घरों से बेघर हो जाएंगे।
साथ ही मांग की कि रेगुलाइजेशन एक्ट 2016 को लागू किया जाए। सरकारी व अर्द्ध सरकारी विभागों से ठेकेदारी प्रथा को खत्म करके वर्करों साथ की जा रही लूट-खसोट बंद की जाए। साल 2020 की मिनीमम वेज में बढ़ोतरी करने, 2004 से बंद पड़ी पेंशन स्कीम बहाल करने, वेतन आयोग की रिपोर्ट प्राप्त करके मुलाजिमों पर लागू करने, पांच डीए की किश्तें व 143 महीनों का बकाया मुलाजिमों व पेंशनरों को नगद रूप में देने, चौथा दर्जा मुलाजिमों को वर्दियां देने, तरक्की के लिए टाइप टेस्ट खत्म करने, जंगलात कर्मचारियों समेत कांट्रैक्ट कर्मियों की पिछले पांच-पांच महीनों की रूकी तनख्वाहें जारी करने, मोबाइल भत्ता वापस करने, 200 रुपये जजिया टैक्स खत्म करने, केंद्रीय वेतन आयोग लागू करने का पत्र वापस लेने और कोरोना दौरान काम कर रहे मुलाजिमों को इंक्रीमेंट देने की मांग की गई।