अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाब में अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने के विरोध में 27 अगस्त को सामूहिक अवकाश लेकर प्रदर्शन किया जाएगा। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट ने राशन कार्ड सत्यापन जैसी ड्यूटियां तुरंत वापस लेने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें न माने जाने पर जोरदार संघर्ष शुरू किया जाएगा।
पंजाब सरकार पर शिक्षा क्रांति के दावे करने के बावजूद अध्यापकों को जनगणना, विशेष जांच रिपोर्ट, ड्रग सर्वेक्षण और स्वास्थ्य कार्ड बनाने जैसे गैर-शैक्षणिक कामों में लगाने का आरोप है। अब पटियाला जिले की दूधनसाधां उप-तहसील में अध्यापकों को राशन कार्ड सत्यापन का काम सौंपा गया है। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के अध्यक्ष रामशरण अलहौर, सचिव जसपाल चौधरी और वित्त सचिव राजिंदर समाना ने कहा कि पंजाब सरकार सरकारी शिक्षा ढांचे को बर्बाद कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछली सरकारों की तुलना में अधिक अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक ड्यूटियों में लगाया जा रहा है। इससे आम लोगों के बच्चों की शिक्षा का स्तर पहले से भी निचले स्तर को छू रहा है। फ्रंट ने इन ड्यूटियों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की है।
पंजाब के सभी अध्यापक 27 अगस्त को सामूहिक छुट्टी लेकर तहसील स्तरों पर रोष प्रदर्शन करेंगे। पटियाला जिले की अध्यापक जत्थेबंदियों ने जिला शिक्षा अधिकारी शालू मेहरा को इस संबंध में नोटिस दिया है। यह प्रदर्शन पंजाब एम्प्लॉइज एंड पेंशनर्स जॉइंट फ्रंट और सांझा मुलाजिम मंच के आह्वान पर होगा। अध्यापकों की मुख्य मांगों में 37 प्रकार के भत्तों की बहाली, 18 फीसदी बकाया महंगाई भत्ता और कच्चे कर्मचारियों को नियमित करना शामिल है। कंप्यूटर अध्यापकों को शिक्षा विभाग में विलय करने की भी मांग की गई है।