दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय सिंथेटिक ड्रग रैकेट में 800 करोड़ के नशीले पदार्थों की तीन खेप कनाडा भेजने की बात सामने आई है।
पटियाला पुलिस ने गिरफ्तार किए रैकेट के मुख्य सरगना देव बहल और उसके साथियों राकेश टिंकू व महिंदर से अंतरराष्ट्रीय मंडी में शुक्रवार को 50 करोड़ की कीमत का 50 किलो रसायन सुडो एफोड्राइन बरामद किया।
एसएसपी हरदियाल सिंह मान ने शुक्रवार को बताया कि ड्रग रैकेट का सरगना देव बहल एक शातिर व्यक्ति है। वह एफोड्राइन और सुडो एफोड्राइन जैसे रसायनों और अन्य कच्चे माल को भारत से खरीद कर हिमाचल, दिल्ली और अन्य राज्यों में स्थित फैक्टरियों में सिंथेटिक ड्रग के रूप में तैयार करने के बाद कनाडा भेजता था।
कनाडा में यह खेप हासिल रिसीव करने वाले के तौर पर टोरंटो में रहने वाले इकबाल सिंह उर्फ पाला की पहचान हुई है। देव बहल बड़े स्तर पर सिंथेटिक ड्रग की तस्करी करता था।
उसकी ओर से कनाडा भेजी गई नशीले पदार्थों की खेप सैकड़ों किलोग्राम में थी। एसएसपी ने बताया कि एक आइस नामी सिंथेटिक ड्रग की खेप पूरी 100 किलो की थी, जो विशेष आर्डर पर तैयार की गई थी। इसकी अंतरराष्ट्रीय मंडी में कीमत 500 करोड़ के करीब है।
देव बहल से पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि वह एक रवि शंकर नाम के व्यक्ति के साथ मिलकर काम करता था। बद्दी स्थित एक फैक्टरी में सिंथेटिक ड्रग सांझे तौर पर तैयार किए जाते थे।
बाद में रवि शंकर ने अपना काम उत्तरी अमेरिका में करने का फैसला कर लिया और अपना हिस्सा देव बहल को बेच दिया। इससे वह इस धंधे का इकलौता मालिक बन गया और उसने अपना नेटवर्क कनाडा और अमेरिका में कायम कर लिया।
रवि शंकर की ओर से कनाडा से अमेरिका को बड़े स्तर पर तस्करी शुरू की गई, लेकिन वह कनाडा और अमेरिका में नशीले पदार्थों के तस्करों की लड़ाई में उलझ गया। देव बहल के मुताबिक रवि शंकर को अमेरिका में कत्ल के आरोप तहत गिरफ्तार किया गया और उसके नशीले पदार्थों की तस्करी में भागीदारी का खुलासा हुआ है।
गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ में यह पता लगा है कि दिल्ली आधारित इस गिरोह की ओर से अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को लुभाने के लिए हर संभव साधनों का इस्तेमाल किया जाता था। देव बहल की ओर से कनाडा के ड्रग अंडर वर्ल्ड में अपना संपर्क कायम करने के लिए महिलाओं को भी इस्तेमाल किया गया। गिरफ्तार देव बहल व उसके साथियों को शुक्रवार को अदालत में पेश करके इनका तीन दिन का पुलिस रिमांड लिया है। इस रैकेट में शामिल अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए टीमें विभिन्न राज्यों में भेजी हैं।