पटियाला पुलिस ने हरियाणा के करनाल शहर में दवा बनाने वाली एक फैक्टरी पर छापा मारकर करोड़ों रुपये की प्रतिबंधित सिंथेटिक ड्रग्स बरामद की है। शुक्रवार को हुई इस कार्रवाई के लिए पुलिस को विभिन्न मामलों में दबोचे गए पांच तस्करों से जानकारी मिली थी।
पकड़े गए तस्करों में चार दिल्ली और एक जालंधर का निवासी है। करनाल में बनाई जा रही सिंथेटिक ड्रग पंजाब समेत कई राज्यों में सप्लाई की जाती थी। छापे की कार्रवाई के दौरान फैक्टरी मालिक और उसका बेटा भागने में सफल रहे।
एडीजीपी (ला एंड आर्डर) दिनकर गुप्ता ने पूरी कार्रवाई की पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि इस साल 28 जून को बनूड़ थाना पुलिस ने कैंटर में सवार फिरोजपुर निवासी जगदीश सिंह को गिरफ्तार कर उससे पांच लाख नशीले कैप्सूल व गोलियां बरामद की थीं।
इसके बाद 4 अगस्त, 2013 को टी प्वाइंट डाहरियां मेन जीटी रोड पर शंभू थाना पुलिस ने एक ट्रक से 22 लाख नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए थे। शंभू थाना पुलिस ने ही 18 सितंबर को करनाल के मोतीनगर निवासी अनिल कुमार से 10 लाख नशीली गोलियां और 48 हजार नशीले कैप्सूल बरामद किए।
इन मामलों के बाद पूरे तस्कर गिरोह का पता लगाने के लिए एसएसपी हरदियाल सिंह मान ने पुलिस सर्कल राजपुरा के कप्तान भूपिंदर सिंह खटड़ा की अगुवाई में विशेष टीम का गठन किया था।
जांच टीम ने आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ करने के साथ-साथ नशीली दवाओं के साथ पकड़े गए बिलों की पड़ताल भी की। इससे पांच अंतर राज्यीय ड्रग तस्करों को दबोचने में पुलिस को सफलता मिल गई। शिवम एनक्लेव दिल्ली निवासी राकेश कुमार, रोशनारा रोड दिल्ली निवासी महेश कुमार, कमला नगर दिल्ली निवासी संजय कुमार और शिवम एनक्लेव दिल्ली निवासी प्रवीन कुमार और प्रीत नगर लाडोवाली रोड जालंधर निवासी कमल राज चावला को पुलिस ने इनके घरों से ही दबोच लिया।
दवाओं की फैक्टरी में बन रहा था ड्रग
गिरफ्तार तस्कर राकेश कुमार ने बताया कि पृथ्वी सिंह चौधरी और उसका लड़का प्रदीप्त चौधरी की करनाल में पायनियर फार्मास्युटिकल और प्राइम फार्मास्युटिकल लिमिटेड नाम से दवा की फैक्टरी है। इसी फैक्टरी से उन्हें प्रतिबंधित ड्रग की सप्लाई मिलती थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि चौधरी पिता-पुत्र के पास दवाएं बनाने का लाइसेंस था। वे फैक्टरी के अगले हिस्से में कानूनी ढंग से दवाएं बनाते थे लेकिन फैक्टरी के पीछे करीब 15 एकड़ रकबे में उन्होंने एक डेयरी फार्म बना रखा है। उसी की आड़ में वहां प्रतिबंधित ड्रग बनाई जाती थीं।
नशीली दवाएं जलाने की कोशिश
पुलिस ने फैक्टरी के मालिक, उसके बेटे के खिलाफ गिरफ्तारी और सर्च वारंट हासिल कर करनाल में छापा मारा। मालिक और उसका बेटा अपनी इनोवा गाड़ी को मौके पर छोड़कर भाग निकले लेकिन पुलिस को फैक्टरी से भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल बरामद हुए।
एडीजीपी गुप्ता ने बताया कि आरोपियों ने पुलिस के पहुंचने से पहले कुछ नशीली दवाओं में आग लगा दी थी लेकिन पुलिस ने आग बुझाकर नशीले पाउडर और गोलियों को कब्जे में ले लिया। मौके से पुलिस को करीब सौ करोड़ के सिंथेटिक ड्रग बरामद हुए।
इनमें 90 किलो डिफेनओक्सीलेट हाइड्रोक्लोराइड, 65 किलो कोडीइन फास्फेट और 25 किलो अन्य नशीला पाउडर है। पुलिस को सात लाख 10 हजार नशीले कैप्सूल, 6600 बोतल पैंसीड्रिल, कैप्सूल के लाखों खोल और पाउच, रैपर बरामद हुए।
मेडिकल स्टोर पर भी थी सप्लाई
एडीजीपी के मुताबिक, फैक्टरी मालिक और उसका बेटा मेडिकल स्टोरों के जरिये भी प्रतिबंधित नशीले ड्रग की सप्लाई कर रहे थे। यह काला कारोबार लुधियाना, जालंधर, मोगा और अमृतसर में काफी फैला था। राजस्थान, यूपी, दिल्ली, गुजरात और अन्य राज्यों में भी ड्रग भेजे जाते थे।