पटियाला। जगह की कमी और मरम्मत के चलते ऐतिहासिक शीश महल में पिछले कुछ समय से बंद पड़ी मेडल गैलरी और बेशकीमती सिक्कों के म्यूजियम को जल्द ही आम लोग दोबारा देख सकेंगे। प्रदेश सरकार ने इस म्यूजियम को माल रोड स्थित महिंदरा कोठी में शिफ्ट करने का फैसला लिया है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 70 करोड़ रुपये खर्चे जाएंगे। 84 कमरों वाली पुरातन महिंदरा कोठी में बेशकीमती मेडल, पुरातन सिक्कों व अन्य सजावटी सामान को प्रदर्शित किया जाएगा।
पटियाला के महाराजा भुपिंदर सिंह व महाराजा यादविंदर सिंह की ओर से इकट्ठा किए गए 3200 से भी ज्यादा मेडल, आर्डर और 3000 के करीब पुरातन सिक्कों को बाद में उन्होंने पंजाब म्यूजियम को तोहफे के तौर पर सौंप दिया था। इनमें महाराजा भूपिंदर सिंह व महाराजा यादविंदर सिंह के खुद के अपने मेडल भी शामिल हैं। पहले यह मेडल गैलरी, महाराजा नरिंदर सिंह की ओर से 1847 में लाहौर के शालीमार बाग की तर्ज पर तैयार कराए गए पुराने मोती बाग के शीश महल में प्रदर्शित की गई थी। वहां जगह की कमी होने पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आने वाली पीढ़ी को अपनी विरासत के रूबरू कराने के मकसद से महिंदरा कोठी को एशियन विकास बैंक के सहयोग से पंजाब के सभ्याचार व सैर सपाटा विभाग की ओर से तैयार विशेष प्रोजेक्ट अधीन करीब 70 करोड़ की राशि खर्च करके इस बेशकीमती खजाने की प्रदर्शनी के वास्ते तैयार कराया है।
सांसद परनीत कौर ने बताया कि मेडल गैलरी व सिक्कों के म्यूजियम में नानकशाही सिक्कों के अलावा पटियाला, नाभा, मालेरकोटला व जींद आदि रियासतों के सिक्के, ईस्ट इंडिया कंपनी, अकबरी, मुगलशाही सिक्के व पटियाला शाही खजाना, पंच मार्क, कुशनस, दिल्ली सल्तनत, सामंत देव, पठान और मुगल काल के सिक्के भी मौजूद हैं। इसके अलावा दो दर्जन मुल्कों के मेडल, महाराजा रणजीत सिंह के लाहौर दरबार के आर्डर, चाइना डबल ड्रैगन आर्डर, इंग्लैंड, विक्टोरियन क्रास, मेडल्स, नायाब व दिलकश सजावटी वस्तुएं दोबारा से सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगी।
परनीत ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को जल्द पंजाब वासियों के हवाले किया जाएगा। बताया कि महिंदरा कोठी की जमीनी व ऊपरी मंजिल पर स्थित 84 कमरों को पुरातन विरासती लुक देने के काम का पहला चरण पूरा हो गया है। यहां मेडलों व सिक्कों की विधिवत प्रदर्शनी और इसकी सजावट आदि के अगले कामों के लिए मुंबई की म्यूजियम डिजाइनक सुरंजना सतवालेकर की सेवाएं हासिल की गई हैं, ताकि यहां आने वाले सैलानियों व आम लोगों को इन सिक्कों, मेडलों व अन्य सजावटी वस्तुओं की ऐतिहासिक, विरासती व पुरातन अहमियत के बारे में जानकारी दी जा सके।