सिविल अस्पताल के सामने खुले नए जच्चा-बच्चा अस्पताल के सामने महीने में दूसरी बार मजदूरों ने प्रदर्शन किया। मजदूर इसलिए नाराज थे क्योंकि उनका अब लाइन पार इलाके स्थित ईएसआई अस्पताल से इलाज बंद हो गया है।
सुबह साढ़े दस बजे से ईएसआई अस्पताल से शुरू हुआ मजदूर संगठनों का रोष मार्च जच्चा-बच्चा अस्पताल तक पहुंचा, जहां करीब दो घंटे तक मजदूरों ने सेहत मंत्री एवं विभाग प्रमुख सचिव विन्नी महाजन और पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान जच्चा-बच्चा अस्पताल में तैनात किए गए ईएसआई अस्पताल के सभी डॉक्टरों और स्टाफ को दोबारा ईएसआई में तबदील करने की मांग पर जोर दिया गया।
इस धरने में भारतीय मजदूर संघ अध्यक्ष बाल मुकंद मिश्रा, एआईटीयूसी (एटक) के महासचिव विनोद पप्पू, क्रांतिकारी यूनियन अध्यक्ष अनुरोध गुप्ता, बाल कृष्ण महासचिव गोबिंदगढ़ वर्कर यूनियन, लोहा फैक्टरी कर्मचारी संघ के राम लखन समेत सैकड़ों मजदूर यूनियनों के कार्यकर्ता शामिल हुए।
धरने में एटक महासचिव विनोद पप्पू ने कहा कि ईएसआई से संबंधित हजारों वर्करों के लाखों बिल पेंडिंग हैं, ईएसआई अस्पताल में पहले की तरह मजदूरों का इलाज शुरू किया जाए, जच्चा-बच्चा अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ को दोबारा ईएसआई अस्पताल में भेजा जाए, जच्चा-बच्चा अस्पताल में जुगाड़ तरीके से न चलाया जाए, 10 हजार बीमा एजेंटों के प्रभावित हो रहे काम को दुरुस्त करने, ईएसआई अस्पताल बंद होने से सैकड़ों डिस्पेंसरियों के प्रभावित हो रहे काम के प्रति रोष जाहिर किया गया।
भारतीय मजदूर संघ के बाल मुकंद मिश्रा ने कहा कि जच्चा-बच्चा अस्पताल बिना तैयारी के चालू किया गया है। मजदूरों को इलाज की पर्ची के लिए पहले दो किलोमीटर ईएसआई अस्पताल में जाना पड़ता है, बाद में जच्चा-बच्चा अस्पताल में आना पड़ता है। उन्होंने एक ही छत के नीचे सभी सहूलियतें प्रदान करने की मांग की। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि उनकी मांगें पूरी न की गई तो वे हाईकोर्ट जाएंगे।
वहीं धरने की खबर आम आदमी पार्टी नेताओं को लगी तो वह मर्सिडीज कार में धरनाकारियों को समर्थन देने पहुंचे। बाल मुकंद मिश्रा ने धरने में कोई राजनीति न करने की बात कहकर उन्हें टाल दिया। आप नेता गुलशन छाबड़ा ने कहा कि हम यहां मजदूरों के हक की आवाज बुलंद करने आए हैं तो मजदूरों ने उन्हें दो मिनट का समय बोलने के लिए दे दिया। छाबड़ा ने कहा कि अकेले मजदूर ही नहीं पूरे शहरवासियों को जच्चा-बच्चा अस्पताल के आगे धरना देना चाहिए क्योंकि अस्पताल में सुविधाओं का अभाव है।