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महान कोष विवाद: मुकदमा और सस्पेंशन रद करनेे की मांग

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-बिना जांच के अध्यापकों पर कार्रवाई करना दुर्भाग्यपूर्ण: पीटीएफ
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी टीचर्स फ्रंट (पीटीएफ) ने भाई काहन सिंह नाभा महान कोष पर उठे विवाद पर पंजाब सरकार से अपील की है कि इसे धार्मिक रंग देने वालों पर सख्ती से लगाम लगाई जाए, क्योंकि भाई काहन सिंह नाभा का महान कोष धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक सभी क्षेत्रों में ज्ञान का भंडार है। इसका सभी बहुत सम्मान करते हैं और शोध के लिए उपयोग करते हैं। फ्रंट ने यह भी कहा कि सरकार की ओर से बिना किसी जांच के पंजाबी यूनिवर्सिटी के शिक्षकों और अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करना एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।
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इस घटना की दोबारा जांच होनी चाहिए और इसके बाद ही उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। बिना किसी जांच के शिक्षकों को निलंबित करने का आदेश और दर्ज किया गया मुकदमा भी रद्द किया जाना चाहिए। फ्रंट ने कहा कि सरकार को इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करना चाहिए। यूनिवर्सिटी के शोध एवं शैक्षणिक वातावरण को बहाल करना चाहिए ताकि शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही छात्रों की शिक्षा का नुकसान न हो और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो। हाल ही में पीयू में पांच-पांच फीट के गड्ढे खोद कर इसमें पानी डालकर महान कोष की प्रतियां फेंक कर नष्ट करने का मामला सामने आया। इस बारे में स्टूडेंट्स जत्थेबंदियों को पता लगा तो उन्होंने रोष प्रदर्शन शुरू कर दिया। विद्यार्थियों ने रोष जताया कि महान कोष में गुरु ग्रंथ साहिब व दशम ग्रंथ की वाणी दर्ज है। ऐसे में महान कोष को पैरों में फेंक कर इस पर पानी डालना बेअदबी है। बाद में इस मामले ने तूल पकड़ा और पुलिस ने यूनिवर्सिटी के वीसी समेत चार अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था। वहीं पीयू प्रशासन ने दो अधिकारियों को सस्पेंड भी कर दिया था।
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