-पंजाबी यूनिवर्सिटी में डीन अकादमिक और पब्लिकेशन ब्यूरो इंचार्ज पर भी कार्रवाई
-महान कोष को मिट्टी में दबाकर नष्ट करने का हुआ था विरोध
-वीसी ने कोताही के लिए दो अधिकारियों को सस्पेंड भी किया
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी में सिख महान कोष की प्रतियों को मिट्टी में दबाकर नष्ट करने के मामले में छात्र संगठनों के विरोध के बाद पटियाला पुलिस ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, डीन अकादमिक और पब्लिकेशन ब्यूरो एंड प्रेस इंचार्ज के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। एसपी (सिटी) पलविंदर सिंह चीमा ने इसकी पुष्टि करते बताया कि इन अधिकारियों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में कार्रवाई हुई है। आरोप हैं कि महान कोष की प्रतियों को फाड़ा गया और मिट्टी में फेंक कर बेअदबी की गई है। नामजद अधिकारियों में वीसी जगदीप सिंह, रजिस्ट्रार डाॅ. दविंदर पाल सिंह सिद्धू. डीन अकादमिक जसविंदर सिंह बराड़ और पब्लिकेशन ब्यूरो एंड प्रेस इंचार्ज डाॅ. हरिंदर पाल सिंह कालड़ा शामिल हैं। इसी बीच वीसी ने पब्लिकेशन ब्यूरो एंड प्रेस के इंचार्ज डाॅ. हरिंदर पाल सिंह कालड़ा और पुनर्वास केंद्र के डायरेक्टर को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने महान कोष को नष्ट करने की विधि में कोताही की है।
संस्कार सेवा के लिए प्रतियों को गोइंदवाल ले जाया गया
पीयू में महान कोष की बेअदबी का एसजीपीसी की ओर से सख्त नोटिस लिया गया। शुक्रवार को एसजीपीसी के अंतरिम कमेटी मेंबर सुरजीत सिंह गढ़ी की अगुवाई में एक विशेष शिष्टमंडल पीयू में पहुंचा। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की निंदा की। इसके बाद गुरुद्वारा श्री दुखनिवारण साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी प्रणाम सिंह ने पश्चाताप की अरदास करते सेवा शुरू कराई। महान कोष की प्रतियों को संस्कार सेवा के लिए गोइंदवाल साहिब ले जाया गया। इस मौके पर सुरजीत सिंह गढ़ी ने कहा कि सिखी के अंदर यह विधान है कि ऐतिहासिक ग्रंथों व पुस्तकों को श्री गोइंदवाल साहिब ले जाया जाता है। जहां पावन मर्यादा के अनुसार संस्कार होता है।
यह है मामला
वीरवार को पंजाबी यूनिवर्सिटी में महान कोष की प्रतियों को मिट्टी में दबाकर नष्ट करने की तैयारी की जा रही थी। इसके लिए यूनिवर्सिटी में पांच-पांच फीट के गड्ढे खोद कर इसमें पानी छोड़कर इनमें महान कोष की प्रतियां फेंकी जा चुकी थीं। इसे देखकर विद्यार्थी गुस्से में आ गए और उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ रोष प्रदर्शन शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद विद्यार्थी नेताओं यादविंदर सिंह यादू व अन्य ने इसे सीधे तौर पर बेअदबी बताया। महान कोष में श्री गुरुग्रंथ साहिब, दशम ग्रंथ और अन्य ग्रंथों की वाणी दर्ज है। मामला गंभीर होता देखकर यूनिवर्सिटी अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंचे और उन्होंने विद्यार्थियों को समझा-बुझाकर माहौल शांत करने का प्रयास किया लेकिन भड़के विद्यार्थियों ने बाद में यूनिवर्सिटी का मेन गेट बंद करके धरना देना शुरू कर दिया। इस मामले को तूल पकड़ता देखकर पुलिस प्रशासन ने थाना अर्बन एस्टेट में इस मामले में यूनिवर्सिटी के वीसी समेत चार अधिकारियों के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में अब केस दर्ज कर लिया है।
भाई काहन सिंह नाभा ने 1930 में बनाया था महान कोष
सिख विद्वान भाई काहन सिंह नाभा ने 1930 में पंजाबी के करीब 80 हजार शब्दों के अर्थों वाला एक महान कोष तैयार किया था। इसकी कुछ साल पहले ही पंजाबी यूनिवर्सिटी ने दोबारा छपाई कराई थी लेकिन छपाई के दौरान काफी गलतियां हो गई थीं। इसके बाद पंजाबी विद्वानों ने महान कोष की इन प्रतियों को नष्ट करने का मुद्दा उठाया जा रहा था। बाद में इस मुद्दे को पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के सामने उठाया गया। पंजाबी यूनिवर्सिटी की ओर से महान कोष के मुद्दे पर संधवां के साथ अगस्त के पहले हफ्ते में बैठक भी की गई थी। इसमें महान कोष में त्रुटियां होने पर यूनिवर्सिटी ने इसे 15 दिनों के अंदर नष्ट करने का भरोसा दिलाया था।