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किसान आंदोलन 2.0 का एक साल: दिल्ली कूच की पांच नाकाम कोशिश से डल्लेवाल के आमरण अनशन तक... जानें कब क्या हुआ

Thu, 13 Feb 2025 08:00 AM IST
निवेदिता वर्मा रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला

सार

किसान एक साल से पंजाब-हरियाणा के बाॅर्डरों पर बैठे हैं। अभी तक किसान अपनी मांगों को केंद्र से पूरा नहीं पाए हैं, लेकिन इस आंदोलन ने किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की ओर से आमरण अनशन शुरू करने के बाद एक नई गति पकड़ी है। इससे पिछले कुछ समय में बड़ी गिनती में किसान आंदोलन के साथ जुड़े हैं। इसके चलते केंद्र को झुकना पड़ा और शुक्रवार को मांगों को लेकर मंत्री स्तर की बैठक किसानों के साथ होने जा रही है।
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किसान आंदोलन 2.0 का एक साल पूरा - फोटो : अमर उजाला/फाइल
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विस्तार
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शंभू व खनौरी बाॅर्डरों पर चल रहे किसान आंदोलन 2.0 को आज एक साल पूरा हो गया है। एक साल के इस आंदोलन में किसानों ने अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए पांच बार दिल्ली कूच की कोशिश की, लेकिन हर बार वह हरियाणा पुलिस प्रशासन के आगे नाकाम रहे हैं।

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इस दौरान किसानों की मांगों पर केंद्र के साथ 8, 12 , 15 और 18 फरवरी 2024 को चार दौर की वार्ता भी हो चुकी है, परंतु यह भी बेनतीजा रही।

दिल्ली कूच की कोशिश में एक किसान की गई थी जान

एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसानों व मजदूरों को कर्ज मुक्त करने समेत करीब 12 मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के बैनर तले पंजाब के अलग-अलग कोनों से किसान दिल्ली कूच के लिए 13 फरवरी, 2024 को शंभू व खनौरी बाॅर्डरों पर जुटे थे, लेकिन हरियाणा पुलिस प्रशासन की तरफ से बैरिकेडिंग करके किसानों को बाॅर्डरों पर ही रोक लिया गया।

हालांकि, इस दौरान किसानों ने आगे बढ़ने के लिए संघर्ष भी किया, लेकिन नाकाम रहे। इसके बाद 21 फरवरी, 2024 को किसान फिर से दिल्ली कूच के लिए बाॅर्डरों से रवाना हुए। इस बार भी किसानों को आगे बढ़ने से रोक लिया गया, लेकिन दोनों तरफ से काफी टकराव हुआ. जिस दौरान एक नौजवान शुभकरण सिंह की मौत हो गई थी और काफी गिनती में किसान घायल भी हुए थे।

डल्लेवाल के आमरण अनशन से मिली मजबूती

इसके बाद भी किसान बाॅर्डरों पर डटे रहे और समय-समय केंद्र के खिलाफ संघर्ष के कार्यक्रम करते रहे, लेकिन बाद में ऐसा लगने लगा कि इस आंदोलन 2.0 ने गति खो दी है। इसे देखते हुए आंदोलन में नई जान फूंकने के लिए किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने 26 नवंबर को आमरण अनशन पर बैठने का एलान कर दिया। डल्लेवाल को रोकने के लिए पुलिस ने उन्हें जबरन खनौरी बॉर्डर से एक दिन पहले ही उठा लिया और लुधियाना डीएमसी दाखिल करा दिया।

किसानों के विरोध के आगे झुकते हुए पुलिस प्रशासन को डल्लेवाल को वापस खनौरी बाॅर्डर भेजना पड़ा। इसी बीच 101 किसानों के जत्थे के छह दिसंबर को शंभू बाॅर्डर से दिल्ली कूच का एलान हुआ। यह जत्था आगे बढ़ने में असफल रहा। इसके बाद आठ दिसंबर को दोबारा दिल्ली कूच के लिए नया जत्था रवाना हुआ। यह जत्था भी नाकाम रहा। फिर 14 दिसंबर को भी किसान आगे नहीं बढ़ सके, परंतु हर बार काफी गिनती किसान हरियाणा पुलिस के साथ टकराव में घायल होते रहे।
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सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

खनौरी बऍर्डर पर आमरण अनशन के कारण कैंसर मरीज किसान नेता डल्लेवाल की बिगड़ती सेहत का सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को डल्लेवाल को मेडिकल सहायता मुहैया कराने के आदेश दिए, लेकिन डल्लेवाल मांगें पूरी होने पर ही अनशन खत्म करने पर अड़े रहे, जिसके चलते केंद्र को झुकना पड़ा। 18 जनवरी को केंद्र के अधिकारी खनौरी बाॅर्डर पहुंचे और 14 फरवरी की बैठक का पत्र किसान नेताओं को सौंपा। अब किसानों की इस बैठक के साथ उम्मीदें लगी हैं।

खेतीबाड़ी माहिरों से हो रही चर्चा, ताकि मजबूती से रख सकें मांगें

किसान नेता काका सिंह कोटड़ा व अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि शुक्रवार की केंद्र के साथ बैठक को लेकर किसान संगठन पूरी तरह से तैयार हैं। विभिन्न खेतीबाड़ी माहिरों के साथ विचार-चर्चा की जा रही है, ताकि मजबूती के साथ बैठक में किसानों की मांगों को रखा जा सके। साथ ही मीडिया के जरिये देश के सभी किसान संगठनों से अपील की गई है कि मांगों के बारे में वह अपने सुझाव या तो टेलीफोन के जरिये या फिर ई-मेल के माध्यम से दे सकते हैं। खनौरी बार्डर पर पहुंच भी सुझाव दिए जा सकते हैं।

ये हैं किसानों की प्रमुख मांगें 

  • एमएसपी की कानूनी गारंटी
  • किसानों व मजदूरों की कर्ज मुक्ति
  • मनरेगा के तहत साल में 200 दिन रोजगार, दिहाड़ी 700 रुपये हो
  • किसानों व मजदूरों के लिए पेंशन स्कीम
  • फसलों के दाम स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों पर तय हों
  • आदिवासियों के लिए संविधान की पांचवीं सूची लागू हो
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