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Patiala News: ट्रैक्टर मार्च को लेकर जत्थेबंदियां एक्शन में, ब्लाक स्तर पर बैठकों का सिलसिला शुरू

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किसानों को बड़ी गिनती में मार्च में शामिल होने को किया जाएगा जागरूक
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ट्रैक्टर मार्च निकालने के बाद डीसी व एसडीएम दफ्तरों के आगे फूंकी जाएंगी नए कानूनों की कापियां-किसान नेता सवाजपुर
पंधेर ने कहा-केंद्र की नीयत व नीति में अंतर, बातचीत करने से पहले बंद बॉर्डरों को खोला जाए
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। देशभर में 15 अगस्त को किए जाने वाले ट्रैक्टर मार्च को लेकर जत्थेबंदियां एक्शन में आ गई हैं। यह ट्रैक्टर मार्च जिला स्तर के साथ-साथ तहसील स्तर पर भी किए जाएंगे। इस दौरान डीसी व एसडीएम दफ्तरों के आगे किसानों की ओर प्रदर्शन करके नए बने कानूनों की कापियां फूंकी जानी है। इन कार्यक्रमों में ज्यादा से ज्यादा किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जत्थेबंदियों की ओर से ब्लाक स्तरों पर बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया गया है। बैठकों में किसानों को केंद्र की गलत नीतियों और एमएसपी की कानूनी गारंटी के लाभों के बारे में जागरूक करके ज्यादा से ज्यादा गिनती में आने के लिए अपील की जाएगी। किसान नेता रणजीत सिंह सवाजपुर ने कहा कि किसान पहले अपनी धान की फसलों के चलते खेतों में व्यस्त थे, लेकिन अब काम काफी हद तक खत्म हो चुका है। इसलिए उम्मीद है कि 15 अगस्त के ट्रैक्टर मार्च में किसान बड़ी गिनती में हिस्सा लेंगे। बैठकों के जरिये किसानों को इस संबंधी प्रेरित भी किया जा रहा है। सवाजपुर ने कहा कि केंद्र के खिलाफ छेड़े इन संघर्ष के कार्यक्रमों में ज्यादा भीड़ करके ही सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है।
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किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने भी किसानों को अपील की है कि बाॅर्डरों पर चल रहे मोर्चों के साथ-साथ संघर्ष के कार्यक्रमों में बड़़ी गिनती में किसान भागीदारी करें। पंधेर ने कहा कि केंद्र के बजट ने मोदी सरकार के किसान व मजदूर विरोधी चेहरे का पर्दाफाश कर दिया है। अब किसानों के पास अपनी मांगें मनवाने के लिए केवल संघर्ष का रास्ता बचा है। इसलिए 15 मार्च के ट्रैक्टर मार्च में भारी भीड़ जुटे। उन्होंने कहा कि खेतीबाड़ी मंत्री ने राज्यसभा में बयान दिया है कि वह किसानों के साथ बातचीत करके मसले हल करेंगे, लेकिन केंद्र की नीयत व नीति में अंतर है। अगर ऐसा नहीं है तो फिर केंद्र सरकार की ओर से बॉर्डरों को खोला क्यों नहीं जा रहा है। जिनके बंद होने से व्यापारियों, व ट्रांसपोर्टरों का करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं आम जनता को आने-जाने में परेशानी हो रही है। केंद्र सही मायनों में बातचीत शुरू करना चाहती है, तो रास्ते खोले और अच्छे माहौल में जत्थेबंदियों से बैठक करे।
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