एडिशनल सेशन जज रजिंदर अग्रवाल की कोर्ट ने बुधवार को करप्शन के करीब 10 साल पुराने केस में डीएसपी रजिंदर पाल सिंह आनंद को बरी कर दिया। जबकि इस केस के दूसरे आरोपी एसआई दरबारा सिंह की केस के ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।
वकील दीप इंद्र कुमार जैन ने बताया कि साल 2003 में पटियाला के तत्कालीन डीएसपी (डी) राजिंदर पाल सिंह आनंद और सीआईए स्टाफ के इंचार्ज एसआई दरबारा सिंह पर राजपुरा के ट्रांसपोर्टर हरि कृष्ण सूद ने आरोप लगाया था कि यह दोनों 27 मार्च 2003 को राजपुरा से उसके ट्रक को जबरन अपने साथ ले गए।
इन दोनों पुलिस अफसरों ने आरोप लगाया कि ट्रकों के कागज जाली हैं। अगले दिन जब वह दोनों पुलिस अफसरों से मिलकर बात करने को पटियाला गया, तो इन्होंने ट्रक छोड़ने के लिए एक लाख रुपये रिश्वत के तौर पर मांगे। इसकी शिकायत हरि कृष्ण सूद ने पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों को कर दी।
बाद में मामला विजिलेंस तक पहुंचा और जांच के बाद ब्यूरो नेे 29 जुलाई 2004 को दोनों पुलिस अफसरों के खिलाफ सरकारी कागजों के साथ अपने फायदे के लिए छेड़छाड़ करने और प्रिवेंशन आफ करप्शन एक्ट के तहत पर्चा दर्ज कर लिया। बुधवार को इस केस की सुनवाई के बाद अदालत ने सबूतों के अभाव के चलते डीएसपी को बरी कर दिया।