धूरी की अनाज मंडी में अपनी पड़ी फसल को दिखाते हुए किसान।
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धूरी की अनाज मंडी में फसल बेचने आए किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां खरीद एजेंसियों और ट्रक यूनियनों के बीच माल भाड़े को लेकर सहमति नहीं बन पा रही। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इसके अलावा मंडी में व्यापक प्रबंध न होने के कारण किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
धूरी मंडी में अपनी फसल बेचने आए गांव धुरा के किसान गुरदीप सिंह, जगरूप सिंह, गुरचरण सिंह ने बताया कि वह मंडी में अपनी फसल बेचने आए हैं किंतु उन्हें यहां कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी में सफाई व्यवस्था बुरी तरह से चरमराई हुई है। बड़ी संख्या में घूम रहे लावारिस पशुओं ने तो किसानों के नाक में दम कर रखा है। पहले खेतों में लावारिस पशुओं से अपनी फसल की रखवाली करनी पड़ रही थी और अब मंडी में भी कुछ हाल ऐसा ही है। इसके अलावा अन्य भी कई ऐसी समस्याओं से किसानों को दो चार होना पड़ रहा है।
धूरी आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष जगतार सिंह ने बताया कि समय पर किसानों की फसल न बिकने की वजह से मंडी में गेहूं की अंबार लगे हुए हैं। अपनी फसल खराब होते देख किसान परेशान हो रहे हैं क्योंकि किसान जो फसल मंडी में लेकर आ रहे हैं वह सरकार द्वारा तय किए नमी के मापदंडों पर पूरी तरह खरी उतर रही है। इसके बावजूद किसानों की फसल की खरीद न होना दुख की बात है। उन्होंने बताया कि मंडी में फडों का बुरा हाल है। इनकी सफाई न होने के कारण किसानों को अपनी फसल ऐसे ही रखने को विवश होना पड़ रहा है।
जिला मंडी अधिकारी सुरिंदर कुमार ने कहा कि धूरी मंडी में खरीद नहीं होने का कारण खरीद एजेंसियों, फूड सप्लाई, लेबर, ट्रक यूनियनों में आपसी किराए का रेट तय न होना है। इस बारे में डीसी संगरूर ने बैठक बुलाकर इसका समाधान निकालने की कोशिश की किंतु ट्रक यूनियनों वाले रेट अभी भी ज्यादा मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंडी में जो भी कमियां हैं उसे शीघ्र दूर किया जाएगा और किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।