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अमानवीय अत्याचार के आरोपी पुलिस मुलाजिम दो दिन के रिमांड पर

Sat, 02 Jan 2016 02:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संगरूर
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थाना सिटी में पुलिसिया कहर का शिकार हुए मंगा सिंह की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। उसका इलाज पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में चल रहा है। पीड़ित पर अमानवीय अत्याचार करने के आरोपी पुलिस कर्मियों को अदालत ने दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
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कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरिंदरपाल सिंह सीबिया ने शुक्रवार को थाने के सामने भूख हड़ताल शुरू करके एसएसपी संगरूर को सस्पेंड करने और थाना सिटी प्रभारी के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है। सांसद भगवंत मान ने इस संगीन मामले को संसद में उठाने की बात कही है।

संगरूर की रामनगर बस्ती में रहने वाले मंगा सिंह को बुधवार को थाना सिटी पुलिस के मुलाजिम शराब बेचने के आरोप में थाने उठाकर ले गए थे और टार्चर के दौरान मंगा सिंह से अमानवीय अत्याचार किया था।
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मंगा सिंह को गंभीर हालत में संगरूर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां से डाक्टरों ने उसे वीरवार को पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में रेफर कर दिया।

मामले में शामिल हवलदार भोला सिंह, होमगार्ड के मुलाजिम इकबाल खां और गुरजंट सिंह को डिसमिस कर दिया गया, जबकि थाना सिटी के प्रभारी जतिंदरपाल सिंह और मुंशी जसवंत सिंह को सस्पेंड कर दिया गया। इसके अलावा पुलिस ने बबलू, जिसके कहने पर पीड़ित मंगा सिंह को पुलिस ने उठाया था, के खिलाफ भी आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरिंदरपाल सिंह सीबिया ने पुलिस के इस अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाते हुए थाना सिटी के सामने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। सीबिया ने कहा कि प्रदेश में शराब के कारोबार पर अकाली दल के हितैषियों ने कब्जा किया हुआ है और वह अपने कारोबार को चलाने के लिए गैरकानूनी तरीके से पुलिस की मदद से लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

जब तक मंगा सिंह को इंसाफ नहीं मिलेगा वह चुप नहीं बैठेंगे और भूख हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने मांग की कि एसएसपी संगरूर की बदली की जाए और थाना सिटी के प्रभारी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाए।

सांसद भगवंत मान ने मामले की निंदा करते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक घटना है। वे इस मामले को संसद में उठाएंगे और इस घटना के बारे में मानवाधिकार आयोग तक पहुंचाकर मामले को गंभीरता से लेने की अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल पुलिस मुलाजिमों के साथ-साथ जिन सीनियर अधिकारियों की आंख तले यह काम हुए हैं, उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जाए।
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