जाली असलहा लाइसेंस प्रकरण में जांच के लिए बागपत गए डीएसपी सुलखन सिंह ने बताया कि वहां के एसएसपी विद्यासागर ने अब तक 12 लोगों के असलहा लाइसेंस जांच के लिए उन्हें मुहैया करवाए हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि फिरोजपुर में फर्जी पतों पर जिन लोगों के असलहा लाइसेंस बनाए गए हैं वे वास्तव में यूपी के बागपत और बड़ौत के रहने वाले हैं। इस मामले में गहराई से जांच जारी है।
इनमें बड़ौत नगर पालिका के चेयरमैन कृष्णपाल मलिक, शिक्षण संस्थान के मालिक बब्बू चेयरमैन और वीरेंदर सिंह सहित एक पूर्व विधायक भी शामिल हैं। डीएसपी सिंह ने बताया कि उनकी जांच में यूपी पुलिस सहयोग दे रही है।
वहीं जाली असलहा लाइसेंस प्रकरणों की सूची में फिरोजपुर का नाम हमेशा ही पहले नंबर पर आता रहा है। सीबीआई द्वारा इस मामले में 2005 में की गई जांच के दौरान फिरोजपुर से ऐसे सैकड़ों जाली लाइसेंस बरामद हुए थे जिनका शहर में कोई अता-पता नहीं था।
उसके बाद से लेकर आज तक फिरोजपुर जाली असलहा लाइसेंस के नाम पर अक्सर ही सुर्खियों में रहा है। बीते 12 जून को पंजाब पुलिस ने उत्तर प्रदेश के जिला औरैया निवासी जिस कमलकांत नामक युवक को गिरफ्तार कर पूछताछ की थी। उसके द्वारा किए गए खुलासों से फिरोजपुर का नाम एक बार फिर से पहले नंबर पर आ गया है।
2005 में सीबीआई टीम ने लोक निर्माण विभाग और जिला परिषद के विश्राम गृहों में कई महीने तक डेरा जमाकर जाली असलहा प्रकरण की जांच की थी। तब सैकड़ों ऐसे लाइसेंस मिले थे जिस नाम का कोई व्यक्ति वहां रहता ही नहीं था। जांच में यह भी सामने आया था कि फिरोजपुर से जारी हुए जाली असलहा लाइसेंसों पर यूपी, हिमाचल और जम्मू कश्मीर में भी हथियार खरीदे गए थे।
इधर फिरोजपुर के डीएसपी सुलखन सिंह की टीम जाली असलहा लाइसेंस की जांच के लिए पिछले कई दिन से उत्तर प्रदेश के बागपत में अड्डा जमाकर बेहद गुप्त तरीके से मामले की जांच कर रही है।
इधर पंजाब पुलिस ने श्री गुरुहरसहाय के भजन गन हाउस से जब 250 कारतूस बरामद कर जांच पड़ताल की तो कोटकपूरा व जलालाबाद के दो गनहाउस मालिकों के नाम सामने आए। इनसे पूछताछ में यूपी के औरैया निवासी असलाह तस्कर कमलकांत का नाम सामने आया।
गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व दिल्ली पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ में जो अपराधी मारे गए थे उनकी जांच पड़ताल में यह खुलासा हुआ था कि उनके असलाह लाइसेंस भी फिरोजपुर से ही जारी हुए थे।