पटियाला की सीबीआई अदालत ने करीब 19 साल पुराने एक केस में फैसला सुनाते हुए करोड़ों के जमीन घोटाले में पटवारी समेत सात लोगों को दोषी पाते हुए तीन-तीन साल कैद की सजा दी।
साथ ही दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया। आरोपियों में पंजाब पुलिस के मुलाजिमों समेत नहरी विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं।
केस फाइल के मुताबिक मई 1997 में पंजाब सरकार ने गांवों में सरप्लस पड़ी सरकारी जमीनों को गरीबों को देने की योजना बनाई थी। इस योजना का गलत ढंग से लाभ उठाने के लिए जून 1997 में जिला होशियारपुर के गांव तखनी के पटवारी रामप्रकाश, कानूनगो सेवाराम के साथ मिलीभगत करके पशुपालन विभाग के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर डॉ. मोहन सिंह निजर, कंडी कैनाल होशियारपुर में एक्सईएन नहरी विभाग भूषण देव, जेई बलराम सिंह राणा, पंजाब पुलिस के अमृतसर में तैनात हेड कांस्टेबल परवीन कुमार, हेडकांस्टेबल राजिंदर सिंह व इसके पिता रतन सिंह ने साजिश रची।
इसके तहत सभी आरोपियों ने फर्जी कागजात तैयार करके खुद को गरीब दिखाकर गांव में सरप्लस पड़ी 435 एकड़ सरकारी जमीन का इंतकाल अपने नामों पर करा लिया। बाद में जब गांव के कुछ लोगों को इस जमीन घोटाले की खबर लगी, तो उन्होंने डीसी होशियारपुर को शिकायत दी।
जांच के बाद पुलिस ने मामले में कुछ आरोपियों के खिलाफ ही केस दर्ज किया। पंजाब पुलिस ने अपने मुलाजिमों को बचाने के लिए कुछ निर्दोष लोगों को इस केस में फंसा दिया। इस पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका डालकर केस की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की गई।
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच की और मामले में 2002 में आरोपियों रामप्रकाश पटवारी, कानूनगो सेवा राम, डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन विभाग डॉ. मोहन सिंह निजर, नहरी विभाग के एक्सईएन भूषण देव, जेई बलराम सिंह राणा, हेडकांस्टेबल परवीन कुमार व राजिंदर सिंह व राजिंदर सिंह के पिता रतन सिंह के खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज किया।
करीब 19 साल पुराने इस केस में सीबीआई अदालत ने फैसला देते हुए पीओ करार भूषण देव को छोड़कर बाकी सातों दोषियों को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई। दोषी रामप्रकाश व कानूनगो सेवा राम पर 6500-6500 रुपये जुर्माना लगा है, बाकी पर 5500-5500 रुपये जुर्माना लगाया गया है।