इस फर्म ने फर्जी बिलों के साथ दिल्ली से 60 करोड़ रुपये की स्क्रैप की खरीद की दिखाई और आगे 10.8 करोड़ रुपये की फर्जी टैक्स क्रेडिट दिखाई। फर्म की ओर से आगे पंजाब के अन्य डीलरों को भी फर्जी क्रेडिट जारी कर दिया जाता था। एडिशनल कमिश्नर पंजाब ने बताया कि लोहे और कबाड़ की जाली व गलत ट्रांजेक्शन की गई थीं।
ई-वे बिल पोर्टल के अनुसार फर्म की ओर से कुल 945 गाड़ियां दिल्ली से खन्नौरी मंडी लोहे और कबाड़ को ट्रांसपोर्ट की दिखाई गईं, जबकि जांच में केवल 67 गाड़ियां ही टोल प्लाजा इरा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड रोहतक हरियाणा से पास की सामने आईं। इन 67 गाड़ियों की पड़ताल करने पर पता चला कि यह गाड़ियां टोल प्लाजा से पास नहीं हुईं और केवल जाली टोल प्लाजा रसीदें ही जारी की गई थीं।
खन्नौरी मंडी में जीएसटी निल दिखाने वाली अन्य संदिग्ध फर्मों की भी होगी जांच
भिंडर ने बताया कि इस मामले में दिलचस्प तथ्य यह है कि इस फर्म ने ऐसा लोहा स्क्रैप किया दिखाया, जो असल में मोटरसाइकिल व स्कूटर ही थे। इस तरह से फर्म की ओर से गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट करके पंजाब राज्य की अन्य फर्मों को पास किया जा रहा था। एडिशनल कमिश्नर ने कहा कि विभाग की ओर से जीएसटी चोरी संबंधी खन्नौरी मंडी की अन्य संदिग्ध फर्मों की भी पड़ताल की जा रही है, जिन्होंने जीएसटी निल भरवाया है।
एडिशनल कमिश्नर ने इस मौके पर बोगस बिलिंग जरिये सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले कारोबारियों को चेतावनी दी कि ऐसे तत्वों के साथ भविष्य में सख्ती से निपटा जाएगा। बताया कि इस मामले में आगे की जांच की जा रही है और किसी अन्य आरोपी के सामने आने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।