दलितों का डीसी कार्यालय के बाहर क्रमिक अनशन
गांव बौड़ां कलां में पंचायती जमीनों के हिस्से पर धनी लोगों को कब्जा देने आरोप
आंदोलनकारियों ने कैप्टन सरकार से बेघर लोगों को प्लाट देने की भी मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। मांगों को लेकर जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के बैनर तले मंगलवार को दलितों ने डीसी दफ्तर के आगे क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी। गांव बौड़ांकलां में दलितों के साथ हो रहे धक्केशाही का विरोध किया गया। साथ ही दलितों की मांगों को उठाते हुए इन्हें जल्द पूरा करने की आवाज उठाई गई। मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।
जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के ओहदेदार गुरचरन सिंह डकौंदा, रणधीर संहि कादराबाद ने कहा कि गांव बौडां कलां में दलितों के साथ अन्याय हो रहा है। गांव धनाढ्य, चौधरियों को दलितों की पंचायती जमीनों के हिस्से पर कब्जा दिया गया है। गांव बौड़ां कलां में दलितों के तीसरे हिस्से की पंचायती जमीन 84 बीघा है। बोली 75 बीघा की होती है और दलितों को पैमाइश में 47 बीघा दी जाती है। दलितों के हिस्से की जमीन गांव के धनाढ्य चौधरी दबाए बैठे हैं और दलितों को 75 बीघा के पैसे भरने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
पिछले साल जब दलितों ने उस जमीन के पैसे भरने से इंकार कर दिया, जो उनको दी ही नहीं, तो अधिकारियों ने पुलिस के पास एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश कर दी। इसी तरह से बीनाहेड़ी, ककराला, सुखेवाल आदि गांवों में पंचायती जमीनों में दलितों का हिस्सा गांवों के धनाढ़्य चौधरी अधिकारियों की मदद से दबाए बैठे हैं। आगे कहा कि दलितों को हरेक साल तीसरे हिस्से की पंचायती जमीन के लिए लड़ना पड़ता है और इसका ठेका बहुत महंगा है। दलित हरे चारे के लिए यह जमीन लेते हैं। इसलिए दलितों के हिस्से के लिए 99 सालों के पट्टे पर कम रेट पर दी जाए। कहा कि गांव सागरे की पंचायती जमीन की बोली डमी हुई है। प्रशासन ने सरकारी हिदायतों की भी कोई परवाह नहीं की। कांग्रेस सरकार ने बेघर लोगों को प्लाट देने के लिए दोबारा फार्म भरवा लिए हैं, लेकिन किसी को प्लाट नहीं दिए। उलटा मिले प्लाटों को पंचायतें छीन रही हैं।