उन्नत किसान
सरकारी नौकरी छोड़ सब्जियों का काश्तकार बना अमरिंदर
आधुनिक तौर तरीकों से सब्जियां की काश्त कर औरों को भी दे रहा है प्रेरणा
रंग बिरंगी शिमला मिर्च, खीरे, करेले, मशरूम और खरबूजों की खेती से मिलता है अतिरिक्त लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पटियाला के नाभा ब्लाक के गांव साधोहेड़ी का एक नौजवान वैसे चाहे ऊंची पढ़ाई (एमएससी, जियो इंफोर्मेटिक्स) के लिए नीदरलैंड भी गया और पंजाब सरकार के रिमोट सेंसिंग सेंटर में बतौर वैज्ञानिक करीब 4 वर्ष नौकरी की। परंतु असली संतुष्टि तो उसे सब्जियों का सफल काश्तकार बनकर ही मिली। यह प्रगतिशील किसान आज रंग बिरंगी शिमला मिर्च, मशरूम, खीरे, करेले, हरी मिर्च और खरबूजों की उन्नत खेती अति आधुनिक तरीकों से करके जहां प्रति एकड़ अच्छा लाभ कमा रहा है। वहीं ही अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
2013 में नौकरी छोड़ कर अपनी 32 एकड़ पारिवारिक जमीन पर कृषि का परंपरागत पेशा अपनाने वाले इस अमरिंदर सिंह ने 4000 वर्ग मीटर के पॉली हाउस से सब्जियों के उत्पादन की शुरुआत की। बाद में 2014 में 4000 वर्ग मीटर का एक और पॉलीहाउस बनाया। यहां से मिले लाभ से वह अधिक उत्साहित किया। इस तरह अमरिंदर सिंह पंजाब सरकार के बागवानी विभाग की तरफ से मिले सहयोग, सब्सिडी और तकनीकी सहायता के बलबूते एक सफल सब्जी उत्पादक बन गए हैं।
पहले लोग हंसते थे, आज पूछने आते हैं
बागवानी विभाग ने अमरिंदर सिंह को प्रति पॉलीहाउस 16 लाख 88 हजार और काश्त वाले समान पर 2 लाख 80 हजार प्रति पॉलीहाउस अलग से सब्सिडी मुहैया करवाई। जबकि उनके मशरूम के कंपोस्ट यूनिट के लिए भी सब्सिडी की स्वीकृति मिल गई है। अमरिंदर सिंह ने बताया कि उसने जब अपनी राजपत्रित अधिकारी की सरकारी नौकरी छोड़ी थी, तो लोग उसका मजाक करते थे। लेकिन आज उसे अपने फैसले पर गर्व महसूस होता है, क्योंकि अन्य किसान भी उससे ऐसी खेती करने के बारे में अक्सर पूछताछ करते रहते हैं।
खेती के अवशेषों का खेतों में ही इस्तेमाल
अमरिंदर सिंह का कहना है कि उसके पास अति आधुनिक कृषि यंत्र हैं। इसके अतिरिक्त वह ग्रीन हाउस पॉलीनेट, ड्रिप सिंचाई, मलचिंग और लौ टनल तकनीकें अपनाने जैसे अध्ययन के लिए विभिन्न खेती केंद्रों का दौरा भी करता रहता है। ऐसा करने का यह लाभ होता है कि सब्जियों में कीड़ेमार दवाओं का प्रभाव जीरो प्रतिशत, भूमिगत जल स्तर की बचत और खेती के अवशेषों का खेतों में ही इस्तेमाल किया जाता है, जिससे धरती की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है। इस मौके पर बागबानी विभाग के पटियाला स्थित कार्यालय के डिप्टी डायरेक्टर स्वर्ण सिंह मान ने कहा कि विभाग की तरफ से इस काश्तकार सहित अन्य किसानों को समय-समय पर तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे खेती लागत घटा कर अतिरिक्त लाभ कमा सकें।