पंजाब सरकार द्वारा आरएसडी प्रोजेक्ट पर कार्यरत कर्मचारियों के तबादले किए जाने के विरोध में सोमवार को प्रभावित महिला कर्मचारियों ने संयुक्त संघर्ष कमेटी के बैनर तले चीफ इंजीनियर के कार्यालय के सामने रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने तबादले तुरंत रद्द करने की मांग की।
रोष धरने को संबोधित करते हुए कामरेड जसवंत संधू, रविदंर सिंह जग्गा, जनक वशिष्ठ, ओम प्रकाश वर्मा, विजय कुमार और बलबीर बैंस ने कहा कि आरएसडी प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान सैकड़ों कर्मचारी शहीद हुए हैं जिनकी विधवाओं को सरकार ने नौकरियां भी दी हैं। अब सरकार उन शहीदों की विधवाओं को दूरदराज के क्षेत्रों में भेजकर परेशान कर रही है जबकि उनके बच्चों के फाइनल पेपर सिर पर हैं । इसके साथ ही सरकार द्वारा निशक्त कर्मचारियों को भी दूरदराज के क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष से भी कम अवधि शेष बची है, उन्हें भी नहीं बख्शा जा रहा है।
कामरेड जसवंत संधू ने बताया कि आरएसडी प्रशासन ने करीब 836 कर्मचारियों के बीबीएमबी चंडीगढ़ और पंजाब सिंचाई विभाग के लुधियाना, पटियाला, फिरोजपुर, जालंधर और तलवाड़ा में तबादले किए हैं, जिनमें करीब 318 महिला कर्मचारियों के नाम हैं। रोष प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने पंजाब सरकार और रणजीत सागर बांध के चीफ इंजीनियर से मांग की है कि विधवा, निशक्त और रिटायरमेंट की कम अवधि शेष वाले कर्मचारियों की आउट ऑफ प्रोजेक्ट किए जा रहे तबादले रद्द किए जाएं।
इन्हें आरएसडी और शाहपुरकंडी प्रेजोक्टों पर भी रखा जाए। संघर्ष कमेटी की ओर से पंजाब के मुख्यमंत्री, सिंचाई मंत्री, सिंचाई सचिव, स्थानीय विधायक और डिप्टी स्पीकर और मुख्य अभियंता को मांगपत्र भेजकर दो वर्ष के बाद सेवामुक्त होने वाले मुलाजिमों और औसती महिला कर्मचारियों के तबादले पर रोक लगाई जाए। इस मौके पर रोशन लाल भगत, कप्तान सिहं छीना, सुरिंदर मान, कमल, सुखदेव सिंह, बलविंदर कौर, हरविंदर कौर, रानी देवी, गुरप्रीत गोपी, गुरनाम सिंह मटौर, सोहन लाल, नंद लाल, हरिंचदर रंधावा और आशू शर्मा सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे।