सोमवार को संक्रांति के मौके पर बनियाल के उज्ज दरिया में नहाने गए आईटीआई के छात्र के डूबने की घटना के बाद मंगलवार को मौके पर गए डीसी व डीएसपी रूरल समेत अन्य अफसरों को ग्रामीणों के गुस्से का शिकार होना पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने अफसरों को खदेड़ लिया और डीसी तथा डीएसपी रूरल के वाहनों को तोड़फोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया। इस बीच स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को हल्का लाठी चार्ज करना पड़ा। मामला तब शांत हुआ जब मौके पर गए स्थानीय गोताखोरों और बीएसएफ के जवानों के प्रयास से शव को नदी से बाहर निकाला गया।
आईटीआई छात्र राकेश कुमार के डूबने की घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से शव का पता लगाने की मांग की थी। बताया जाता है कि गुरदासपुर और पठानकोट में सरकारी गोताखोर न होने के कारण प्रशासन की ओर से छात्र के शव को दरिया से बाहर निकालने में दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। आखिरकार मंगलवार को ग्रामीण नदी के किनारे ही धरने पर बैठ गए। इससे मौके पर तनाव की स्थिति उत्पन्न बनी रही। लोगों के रोष को देखते हुए जिलाधीश पठानकोट सिबन सी, विधायक सीमा देवी, डीएसपी ग्रामीण प्रभजोत सिंह, बीएसएफ के इंस्पेक्टर बाबू यादव भी पुलिस पार्टी सहित पहुंचे। धरना दे रहे लोगों को जब जिलाधीश ने बताया कि जिला पठानकोट व गुरदासपुर के पास सरकारी गोताखोर नहीं हैं, तो लोग भड़क उठे और उन्होंने अफसरों पर पथराव करना शुरू कर दिया। इस बीच किया प्रकार अफसरों ने वहां से चले जाना ही मुनासिब समझा। बाद में बीएसएफ के जवानों और स्थानीय गोताखोरों के संयुक्त प्रयास से नदी से युवक का शव बाहर निकाला जा सका।