अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजीव कालरा की अदालत ने पत्नी को खुदकुशी के लिए मजबूर करने के आरोप में पति को दस साल कारावास की सजा का फैसला सुनाया है।
गांव घो निवासी नीरज की शादी ग्रेफ में कार्यरत गांव गुड़ा कलां निवासी राजिंद्र के साथ 2 अगस्त 2010 को हुई थी। उनके पांच माह की एक बेटी थी। 22 फरवरी 2012 को नीरजा ने जहरीला पदार्थ निगलकर खुदकुशी कर ली थी। मृतका के पिता मनोहर लाल पर आरोप लगाया था कि शादी के बाद ससुराल की डिमांड पर नीरज को बीएड भी कराई और उसे एक एक्टिवा भी खरीदकर दिया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजिंद्र हमेशा उसे कार के लिए प्रताड़ित करता था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राजिंद्र के अवैध संबंध के बारे में पता चलने पर नीरज ने उसे रोका, लेकिन वह उसके साथ हमेशा मारपीट करता था।
इससे तंग आकर उनकी बेटी ने सल्फास निगल लिया और उसकी अस्पताल में ईलाज के दौरान मौत हो गई। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को दामाद राजिंद्र सिंह प्रताड़ित करता थे जिससे उसने आत्महत्या को मजबूर किया गया। इसकी शिकायत पर थाना सदर पुलिस ने राजिंद्र के खिलाफ खुदकुशी के लिए मजबूर करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।