पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर बहते रावी दरिया में सीमा विवाद के कारण खनन माफिया की पौह बारह है। आजादी के छियासठ साल गुजरने के बाद भी अब तक दरिया की निशानदेही नहीं हो सकी है। इस कारण दरिया में अवैध खनन जोरों पर है जिसे रोकने में सीमा विवाद आड़े आ रहा है। इससे खनन माफिया के हौसले बुलंद हो चुके हैं और दोनों राज्यों के खनन माफिया एक-दूसरे के राज्य की सीमा में घुसकर खनन कर कमाई करने में लगे हैं।
पंजाब और जेएंडके के बीच माधोपुर में रावी दरिया बहता है लेकिन आज तक उसकी निशानदेही नहीं हो सकी है और अभी तक पता नहीं चल सका है कि दरिया का कितना भाग पंजाब में पड़ता है और कितना हिस्सा जेएंडके के कठुआ में बहता है। आजादी के बाद वर्ष 1975 में दोनों राज्यों के बीच दरिया की निशानदेही के लिए फैसला किया गया, लेकिन अब तक उस दिशा में कुछ नहीं हो सका है।
लिहाजा दरिया से सटे कीड़ियां में 41, माधोपुर और बेहड़ियां इलाकों में ही 59 क्रशर लग चुके हैं और रोजाना भारी तादाद में बजरी और रेत के ट्रक निकलते हैं। निशानदेही नहीं होने की वजह से अब तक तय नहीं हो सका कि माफिया प्रतिबंधित पंजाब की हदबंदी में खनन करा रहे हैं या फिर जम्मू-कश्मीर की सीमा में खनन कर रहे हैं, जहां पर वे बाकायदा ठेका होने का दावा करते हैं।
बताया जा रहा है कि दो साल पहले सीमा विवाद के निपटारे के लिए कठुआ जिला प्रशासन ने दरिया में अपने हिस्से में बुर्जियां भी लगाई थीं, लेकिन खनन माफियाओं ने उसे भी उखाड़ फेंका है। इससे पहले भी जम्मू-कश्मीर के हिस्से में पंजाब के माइनिंग ठेकेदारों के खनन करने को लेकर कई बार कठुआ प्रशासन पंजाब के सामने आपत्ति भी जता चुका है। लेकिन रावी दरिया में सीमा विवाद हल नहीं होने की वजह से खनन को लेकर स्थिति जस की तस बनी है। इसका फायदा खनन माफिया उठा रहे हैं।
इस संबंध में माइनिंग विभाग के जीएम वरिंदर पाल सिंह का कहना है कि उक्त मामला रेवेन्यू विभाग से संबंधित है। उन्होंने कहा कि निशानदेही के अभाव में खनन को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। दोनों राज्यों के बीच रावी दरिया की निशानदेही के लिए जिलाधीश को अवगत कराया गया है।
पठानकोट में 47 क्रशर अवैध
जिले में बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के 47 क्रशर अवैध रूप से चल रहे हैं, उन पर खनन विभाग ने कार्रवाई के लिए तैयारी भी शुरू कर दी है। फिलहाल अवैध क्रशरों को अपना रजिस्ट्रेशन कराने के आदेश दिए गए हैं। उक्त 47 क्रशर दो साल से सरकार के खजाने को चूना लगाने में लगे हैं। उनका अभी तक कोई रिकार्ड भी नहीं मिल सका है। जांच में सामने आया है कि एक ही फर्म के नाम पर दो-दो और कई जगह पर तीन क्रशर भी चलाए जा रहे हैं। उनका कोई रिकार्ड खनन विभाग के पास नहीं है। जबकि उनके रजिस्ट्रेशन की कोई फीस तक विभाग के पास जमा नहीं हो सकी है। जानकारी के मुताबिक खनन विभाग की चार दिन में जांच के बाद जिले में कुल 232 क्रशर चल रहे हैं, उनमें मीरथल में 119, बेहड़ियां-माधोपुर में 59, कीड़ियां-नरोट जैमल सिंह में 41 और हरियाल में 12 क्रशर चल रहे हैं। खनन विभाग के जीएम बलविंद्र पाल सिंह ने बताया कि जांच में 47 क्रशर विभाग के बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार के नियमों के मुताबिक किसी भी इंडस्ट्री को चलाने से पहले विभाग से रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है, लेकिन उक्त ने सिर्फ प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से ही एनओसी लेकर दो साल से क्रशर चलाना शुरू कर दिया है। जीएम ने बताया कि उक्त क्रशरों को नियमित कराने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा गया है, ऐेसा नहीं करने पर उनके क्रशर बंद करा दिए जाएंगे।