खनन विभाग की कार्रवाई के विरोध में रविवार को जिला स्टोन क्रशर यूनियन ने साहिब सिंह साबा की अध्यक्षता में स्थानीय लेबर शेड में धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस मौके पर यूनियन ने 21 अक्तूबर को डीसी दफ्तर के बाहर धरना देने का फैसला किया।
साहिब सिंह साबा और विजय पासी ने कहा कि केंद्र और पंजाब सरकार की आपसी लड़ाई में क्रशर उद्यमियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना वजह अवैध खनन के नाम पर तंग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के आपसी मतभेद के कारण जिले की खड्डों में खनन के लिए दो साल से मंजूरी नहीं मिल सकी है, जबकि खड्डों को पर्यावरण संबंधी क्लीयरेंस मिल चुकी है।
उन्होंने कहा कि क्रशर उद्यमी जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से कच्चा माल ला रहे हैं और उसका रिकार्ड रखने का बहाना बनाकर उनके क्रशर बंद कराए जा रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि सरकार प्रदेश में औद्योगिक घरानों को इंडस्ट्री लगाने के लिए प्रेरित कर रही है, लेकिन स्थानीय क्रशर इंडस्ट्री को उजाड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की उद्योग विरोधी नीतियाें के कारण जिले का प्रमुख स्टोन क्रशर उद्योग तबाही के कगार पर पहुंच चुका है।
उन्हाेंने कहा कि करोड़ों रुपये के कर्ज लेकर क्रशर उद्यमी अपने व्यवसाय को जैसे-तैसे चला रहे हैं। अवैध खनन के नाम पर क्रशर इंडस्ट्री कभी केंद्र तो कभी राज्य सरकार के निशाने पर है जिससे क्रशर उद्यमियों में हाहाकार मचा हुआ है। उन्हाेंने दावा किया कि क्रशर उद्यमी निर्देशाें के अनुसार जिले में किसी भी प्रकार की अवैध माइनिंग नहीं कर रहे हैं। इसके बावजूद क्रशर इंडस्ट्री प्रताड़ित हो रही है।
इस अवसर पंकज महाजन, पंकज भनोट, रविंदर अब्बी, तरुण महाजन, नीरज कुमार, अरुण अब्बी, निर्मल सिंह, अश्वनी बजाज, बिल्लू, बलविंदर सिंह, फतेह सिंह, राजेंदर सिंह, गोपाल शर्मा, बोधराज उपस्थित रहे। इस संबंध में खनन विभाग के जीएम बलविंदर पाल सिंह ने कहा कि किसी भी क्रशर उद्यमी को तंग नहीं किया जा रहा है। उनसे सरकार के नियमों के मुताबिक रेत-बजरी और कच्चे माल की खरीद-फरोख्त का ब्योरा मांगा गया है।