नशाखोरी के बढ़ते जाल में फंसने वालों की फेहरिस्त लंबी है। अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक इसी वजह से कई घर तबाह हो चुके हैं। हलांकि जिले में केन्द्र सरकार की वित्तीय सहायता से प्रोजेक्ट डायरेक्टर रमेश महाजन के नेतृत्व में चल रहे रेडक्रास नशा छुड़ाओ तथा पुर्नवास केन्द्र उजड़ते घरों को बचाने की कवायद में जुटा हुआ है।
केंद्र की ओर से जारी प्रयास के तहत ही अब तक कई लोगों को नशे के गिरफ्त से छुटकारा दिलाया जा चुका है। केन्द्र में 35 के करीब नशों से पीड़ित दाखिल रोगियों के साथ बातचीत में एक इलेक्ट्रानिक इंजीनियर हिसार के अशीश सिंह ने बताया कि वह और उसका बड़ा भाई अमित दोनों इंजीनियर है। तकनीकी तौर पर माहिर होने के कारण वह दो विभिन्न बहुउद्देश्ीय कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं।
मां को माइग्रेन की बीमारी के कारण कुछ लोगों ने उपचार के नाम पर विभिन्न तरह के नशों के टीके लगाकर पूर्णतया नशेड़ी बना दिया है। इसके अतिरिक्त मां की एक सहेली खुद भी पक्की नशेड़ी है। मां की सहेली की नौजवान बेटी भी नशेड़ी थी। उसके संबंध मेरे बड़े भाई अमित से बन गए। दोनों ने विवाह इस शर्त पर करवा लिया कि विवाह के तुरंत बाद वह नशों का त्याग कर देगी। अशीश के अनुसार उसका भाई भी विवाह के तुरंत बाद अपनी नवविवाहित पत्नी की तरह नशेड़ी बन गया।
घर के हालात ऐसे बन गए कि पिता अलग रहने लगे। मां अपनी सहेली के साथ अलग रह रही थी। इसके अतिरिक्त मेरा बड़ा भाई अमित पत्नी के साथ अलग रह रहा था। नशों की लत इस कदर बढ़ गई कि मेरी मां और मां की सहेली तथा मेरी भाभी तीनों ही नशों के बुरे प्रभाव के कारण अपने जीवन से हाथ धो बैठे। अब पिता हिसार के किसी गांव में अकेले रहते हैं। हम दोनों भाई इस रेड क्रास नशा छुड़ाओ केन्द्र में दाखिल होकर अपना उपचार करवाकर 6 माह पहले अपनी अपनी नौकरी पर चले गए थे।
उसने बताया कि मेरा भाई अमित अच्छा इंजीनियर है और वह अपनी नौकरी बेहतर ढंग से कर रहा है। लेकिन मैं कुछ दोस्तों के बहकावे में आकर दुबारा शराब पीने का आदी हो गया। जिस कारण अब फिर इस केन्द्र में दाखिल होकर अपना उपचार करवा रहा हूं। 10 दिन पूर्व केन्द्र में दाखिल हुए इंजीनियर अशीश ने बताया कि मैं अब पूर्णता ठीक हूँ और नियमित समय के बाद गुड़गांव में अपनी नौकरी पर चला जाऊंगा। रोते हुए उक्त इंजीनियर ने बताया कि नशों कारण उनका घर तबाह हो गया।
केंद्र में उपस्थित इंजीनियर जोगिन्द्र सिंह नानोवालिया, दिलबाग सिंह चीमा, डा.केएस बब्बर व रमेश महाजन ने बताया कि इंजीनियर अशीश के घरेलू हालात जैसे नशों से प्रभावित अनेकों उच्च शिक्षा प्राप्त नौजवान इस केन्द्र से अपना उपचार करवाकर जा चुके हैं।